मातृत्व अवकाश देने में नियमित—अस्थायी कर्मचारियों में भेद न करें: मद्रास हाइकोर्ट

याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य के कई जिलों में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अस्थायी महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश के आवेदन लंबित हैं और उन पर उपयुक्त कार्यवाही नहीं की गई है।

By: Ram Naresh Gautam

Updated: 21 Aug 2021, 05:44 PM IST

चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने तमिलनाडु सरकार को मातृत्व अवकाश प्रदान करते समय नियमित और अस्थाई कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं करने का निर्देश दिया है।

तमिलनाडु में प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा 2016 में विवाहित महिला सिविल सेवकों के लिए मातृत्व अवकाश 180 दिनों से बढ़ाकर 270 दिन कर दिया गया था।

2020 में यह सुविधा अस्थाई महिला कर्मचारियों को भी अधिकृत कर दी गई। चेन्नई के एक वकील राजगुरु ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दावा किया कि उक्त आदेश की पालना नहीं हो रही है।

अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य के कई जिलों में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अस्थायी महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश के आवेदन लंबित हैं और उन पर उपयुक्त कार्यवाही नहीं की गई है।

याचिका में उन अस्थायी कर्मचारियों को सवैतनिक मातृत्व अवकाश प्रदान करने का आदेश देने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति एन. कृपाकरण की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को एक समान मातृत्व अवकाश प्रदान करने का निर्देश दिया, जिसमें सलाह दी गई कि मातृत्व अवकाश देने में महिला कर्मचारियों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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