रेमडेसिविर के पीछे न करें 20 हजार खर्च, दो रुपये की डेक्सामेथासोन भी कारगर

  • टूटती सांसों की डोर थाम सकता है 10 रुपए का डेक्सामेथासोन इंजेक्शन

By: Ram Naresh Gautam

Published: 22 Apr 2021, 06:23 PM IST

चेन्नई. कोरोना से संक्रमित अपने परिजनों की जान बचाने के लिए लोग रेमडेसिविर इंजेक्शन की मुंह मागी कीमत देने को तैयार हैं जिन्होंने किसी तरह पाकर लगवा भी दिया क्या वह बच गए यह बड़ा सवाल है।

इस बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि इस इंजेक्शन का कोई खास फायदा नहीं है इसलिए इस दवा को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता नहीं दिया।

हाल ही में ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि दुनियाभर में बेहद सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा डेक्सामेथासोन कोरोना वायरस से संक्रमित और गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान बचाने में मददगार हो सकती है।

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल ब्रिटेन में संक्रमण के शुरुआती दौर से ही किया जाता तो करीब पांच हजार लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम ने अस्पतालों में भर्ती 2000 मरीजों को यह दवा दी और उसके बाद इसका तुलनात्मक अध्ययन उन 4000 हजार मरीजों पर किया, जिन्हें दवा नहीं दी गई थी।

जो मरीज वेंटिलेटर पर थे, उनमें इस दवा के असर से 28 फीसदी से लेकर 40 फीसदी तक मरने का जोखिम कम हो गया और जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी उनमें ये जोखिम 20 फीसदी से 25 फीसदी तक कम हो गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना संक्रमण का इन्फेक्शन शरीर में इनफ्लेमेशन (सूजन) बढ़ाने की कोशिश करता है जबकि डेक्सामेथासोन इस प्रक्रिया को धीमी करने में असरदार पाई गई।

चूंकि यह दवा सस्ती भी है, इसलिए गरीब देशों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

भारत में इसका इस्तेमाल 1960 के दशक से

भारत में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल 1960 के दशक से जारी है और जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई, इसका चलन भी बढ़ा।

अनुमान है भारत में डेक्सामेथासोन की सालाना बिक्री 100 करोड़ रुपए से भी ज़्यादा है और जानकार इस बिक्री को खासा बड़ा इसलिए बताते हैं क्योंकि दवाई बेहद सस्ती है।

भारत सरकार के ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर पॉलिसी के तहत इस दवा की गोलियों के पत्ते और इंजेक्शन पांच से लेकर 10 रुपए के भीतर खरीदे जा सकते हैं।

डब्ल्यूएचओ की सकारात्मक प्रतिक्रिया
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने भी इस शोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा हम डेक्सामेथासोन पर हुई रिसर्च का स्वागत करते हैं जो कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु दर में कमी ला सकती है।

हमें जीवन को बचाने और नए संक्रमण को फैलने से रोकने पर ध्यान देना होगा।

  • सूजन के अधिक होने पर इसका उपयोग एन्टीबायटिक के साथ होना चाहिए। विशेष कर जब शरीर में सूजन के अधिक होने पर इसका उपयोग किया जाता है। रोगी के एडमिट होने पर इसका उपयोग किया जाता है।
    डा. आनंद, नोडल आफिसर, ओमंदूरर मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल फॉर कोविड-19
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