पौधरोपण में डीवीएसी ने किया भ्रष्टाचार का खुलासा

पौधरोपण में डीवीएसी ने किया भ्रष्टाचार का खुलासा

Ritesh Ranjan | Publish: Jun, 14 2018 08:36:05 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

यह मामला वन विभाग द्वारा तमिलनाडु बायो डायवर्सिटी कंजर्वेशन ग्रीनिंग प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन से जुड़ा है

चेन्नई. दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के मुख्यमंत्री रहने के दौरान चलाई गई वृक्षारोपण योजना में सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (डीवीएएसी) ने वन विभाग के कम से कम १० सेवानिवृत्त व सेवारत अधिकारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के मामले से पर्दा उठाया।

यह मामला वन विभाग द्वारा तमिलनाडु बायो डायवर्सिटी कंजर्वेशन ग्रीनिंग प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन से जुड़ा है जिसमें जापान की अंतरराष्ट्रीय कारपोरेशन एजेंसी की सहायता ली गई है। इस परियोजना के तहत हर वर्ष ६८६.२८ करोड़ रुपए आवंटित किए जाते थे जिसके तहत निजी जमीन पर लम्बे व कम समय में बढऩे वाले विभिन्न प्रकार के पेड़ लगाने का काम था। इसमें १९.८० रुपए पौधा लगाने और ११.९५ रुपए हर पेड़ के पोषण के लिए दिया जाता है।

डीवीएसी ने वन विभाग के नौ अधिकारियों के खिलाफ इस मामले में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं जिनमें एक कांट्रेक्टर का नाम भी शामिल है। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने कोयम्बत्तूर और कृष्णगिरि जिले में पौधरोपण के नाम पर २२ लाख रुपए का गबन किया।


कोयम्बत्तूर में सरकार ने १६ क्लस्टर गांव में २८६ किसानों की मदद से १.७ लाख पेड़ लगाने की योजना बनाई थी। इसके लिए ३३.६६ लाख रुपए आवंटित किए गए थे। आरोपी वानिकी विस्तार अधिकारी के. शेखर, सेवानिवृत्त रेंजर जिसे फिर से कांट्रेक्ट के तौर पर बहाल किया गया था और कांट्रेक्टर डी. गणेशन ने १२ वाउचर तैयार कर दिखाया कि १.७ लाख सीडिंग लाभार्थियों को देकर उनका रोपण किया गया। इस फर्जी रिकार्ड के आधार पर गणेशन को १०.७७ लाख रुपए दिए गए।

इसी प्रकार वर्ष २०१४-१५ में कृष्णगिरि में सरकार ने १५,००० टीक, १.०५ लाख सिल्वर ओक, १२,५०० मलै वेम्बु, २,५०० कुमिल और ५,००० रोजवुड के पेड़ तीन $क्लस्टर में लगाने थे।

डीवीएसी का कहना है कि वन विभाग के नौ अधिकारियों ने फर्जी आंकड़े और सबूत देकर ११.०३ लाख रुपए का गबन किया। इस मामले में कृष्णगिरि के के. नागेश, उत्तांगरै के जी. विमलनाथन, रयाकोट्टै रेंज के वन अधिकारी पन्नीरसेल्वम, कृष्णगिरि के वन अधिकारी अन्नादुरै, होसूर के वन अधिकारी डी. वेझावेंदन, केलमंगलम के सेवानिवृत्त वन अधिकारी एम. पेरुमाल, कृष्णगिरि के वन अधिकारी एम. रामकृष्णन, होसूर के पूर्व रेंजर पी. मोहन कुमार और होसूर के रेंजर वी. नागराजन आरोपी हैं।


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