ग्यारह साल के इंतजार का मिला फल

ग्यारह साल के इंतजार का मिला फल

Mukesh Sharma | Publish: Aug, 12 2018 11:15:15 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

ग्यारह साल के लम्बे इंतजार के बाद सत्यश्री शर्मिला का सपना साकार हुआ। ३६ साल की किन्नर का नाम बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु एंड..

चेन्नई।ग्यारह साल के लम्बे इंतजार के बाद सत्यश्री शर्मिला का सपना साकार हुआ। ३६ साल की किन्नर का नाम बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु एंड पुदुचेरी में शामिल किया गया है। वह उन ४८५ अधिवक्ताओं में से थी जिनका नाम बार काउंसिल में दर्ज किया गया।

सत्यश्री ने लॉ की पढ़ाई सेलम के सेंट्रल लॉ कॉलेज से वर्ष २००७ में पूरी की। इस पेश में थर्ड जेंडर के लिए कोई जगह नहीं होने के चलते उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद कई गैर-सरकारी संगठनों के लिए काम किया। नेशनल लिगल सर्विस अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जब किन्नरों को थर्ड जेंडर की संज्ञा दी तबसे उनका फोकस बदला और खुद को कानूनी पेशे में लाने के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी। उन्होंने कहा मुझे यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष और भेद-भाव का सामना करना पड़ा। मैं चाहती हूं कि मेरे बाद अब किसी और को ऐसी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।

सत्यश्री रामनाथपुरम की रहने वाली हैं। समाज के दवाब के कारण उन्होनें काफी कम उम्र में अपने परिवार से नाता तोड़ अलग रहना शुरू कर दिया क्योंकि वह नहीं चाहती कि उनके कारण परिवार को किसी प्रकार की शर्मिंदगी झेलनी पड़े।

अपने सामाजिक अनुभव से परे बार काउंसिल के अनुभव को साझा करते हुए सत्यश्री ने कहा कि मेरे साथ यहां कोई भेद-भाव नहीं किया गया। मेरे कानूनी पेशे में आने से किन्नर समुदाय में आशा की किरण जगी है। मैं उनके हक और अधिकारों के लिए लड़ूंगी। सूची में मेरा नाम देखकर बार काउंसिल के सचिव सी. राजकुमार ने कहा कि मैं ऐसे लोगों को आगे आने का मौका देना चाहता हूं। वहीं इस मौके पर न्यायाधीश पीएन प्रकाश ने कहा कि वह जल्द उनका नाम जजों की सूची में देखना चाहते हैं।

ऋण वसूली के लिए बैंक कर रहा दबंग दलालों का इस्तेमाल: वाइको

एमडीएमके प्रमुख वाइको ने एक बैंक पर विद्यार्थियों, किसानों और छोटे व्यापारियों से ऋण वसूली करने के लिए दबंग दलालों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यहां जारी एक विज्ञप्ति में वाइको ने कहा बैंक ने ऋण वसूली के लिए एआरसी नामक एक निजी एजेंसी को नियुक्त किया है।

नियुक्त किए गए एजेंट ऋण लेने वाले विद्यार्थियों, किसानों और छोटे व्यापारियों को वसूली के दौरान धमकाते हैं। उन्होंने कहा कि कानून के तहत पढऩे के लिए ऋण लेने पर किसी प्रकार की गारंटी नहीं देनी पड़ती है और ऋण को वापस देने के लिए उनके पास ५ से ७ साल का समय भी होता है। लेकिन शिक्षा पूरा होते ही दलाल विद्यार्थियों के घर जाकर उनके परिजनों को ऋण वापस करने के लिए अपमानित करते है।

वाइको ने आरोप लगाया कि वसूली के बाद एजेंट १५ प्रतिशत पैसा ही बैंक को वापस लौटाते हैं, बाकी का खुद रख लेते है। यही कारण है कि एजेंट लोन लेने वालों के साथ बदसलूकी से पेश आते हंै। एजेंटों को इस्तेमाल करने की बजाए अगर बैंक यह घोषणा कर दे कि ऋण लेने वाले को सिर्फ १५ प्रतिशत ही लौटाना होगा तो लोग अपने से आकर पैसा वापस कर देंगे। ऋण वसूली के नाम पर बदसलूकी करना सही नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से बैंक को दलालों को तत्काल में हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया।

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