पॉवर ग्रिड प्रोजेक्ट को लेकर किसानों में तीखा विरोध

। किसानों में इस बात को लेकर चिंता है कि उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन से उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है...

By: Arvind Mohan Sharma

Published: 10 Feb 2018, 01:48 PM IST

तिरुपुर. पॉवर ग्रिड कारपोरेशन आफ इंडिया के तमिलनाडु के पुगालुर व छत्तीसगढ़ के रायगढ़ को जोडऩे के विशाल प्रोजेक्ट का पश्चिमी तमिलनाडु के किसान तीखा विरोध कर रहे हैं। किसानों में इस बात को लेकर चिंता है कि उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन से उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसानों ने केन्द्र व राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन टावरों के बजाय भूमिगत तारों के जरिए परियोजना को क्रियान्वित किया जाए। लगभग 5700 करोड़ रूपए की लागत वाली परियोजना में 1830 किमी की लिंक लाइन होगी जो दक्षिणी राज्यों को उत्तर भारत से जोड़ेगी। लिंक के जरिए 6000 मेगावाट बिजली ट्रांसमिट की जाएगी। लिंक से तमिलनाडु के १५ राज्यों को जोड़ा जाएगा।

 

ट्रांसमिशन लाइन के पास स्थित खेतों में फसल उत्पादन के लिए किसानों को कई तरह के निषेधों का सामना करना पड़ेगा
जहां तक तिरुपुर जिले का सवाल है, पुगलूर में एक इलेक्ट्रिकल स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही अरसूर, इडरायरपाल्यम, कोयम्ब्ततूर जिले में मईवाडी, केरल में त्रिशूर और तिरुवन्नामलई की पांच मेगा ट्रासमिशन लाइनें इचीपट्टी पहुंचेंगी। एक संगठन के अध्यक्ष एसपी वेत्री के अनुसार इनके साथ ही अन्य जगहों से भी ट्रांसमिशन लाइन यहां पहुंचेगी। राज्य में हजारों कृषि भूमि पर ट्रांसमिशन टॉवरों की स्थापना की जाएगी। जिसके लिए टॉवर निर्माण के लिए छोटी-छोटी जगहों का अधिग्रहण किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो ट्रांसमिशन लाइन के पास स्थित खेतों में फसल उत्पादन के लिए किसानों को कई तरह के निषेधों का सामना करना पड़ेगा। इसकी वजह से जमीन का बाजार मूल्य घट जाएगा।

 

यदि किसी किसान के खेत से ट्रांसमिशन लाइन गुजरती है तो उसे लगभग 20000रुपए का मुआवजा दिया जाएगा...
एक किसान का कहना है कि यदि किसी छोटे किसान के खेत से ट्रांसमिशन लाइन गुजरती है तो उस पर बुरा असर पड़ेगा। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी किसान के खेत से ट्रांसमिशन लाइन गुजरती है तो उसे लगभग 20000रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। इसी तरह से यदि किसान के खेत से नारियल पेड़ काटे जाते हैं तो भी उसे भी 20000 रुपए मुआवजा मिलेगा।किसानों का कहना है कि केरल जैसे राज्य जहां भूमिगत तारों के जरिए ट्रांसमिशन लाइनें दी जा रही हैं, ऐसा ही इस परियोजना में क्यों नहीं किया जा सकता। सरकार राजमार्गों के बगल से भूमिगत तार बिछा सकती है। भूमिगत तार ऊपरी तारों की तुलना में महंगे हो सकते हैं लेकिन इससे किसान नुकसान से बच जाएंगे।

Arvind Mohan Sharma Desk
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