आंजनेयर मंदिरों में हुआ भगवान का अभिषेक

यहां गुरुवार को हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर मंदिरों में भगवान आंजनेयर का अभिषेक हुआ और पूजा व हवन में सैकड़ों...

By: मुकेश शर्मा

Published: 07 Jun 2018, 10:28 PM IST

नेल्लोर।यहां गुरुवार को हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर मंदिरों में भगवान आंजनेयर का अभिषेक हुआ और पूजा व हवन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। शहर के दरगहमिट्टा स्थित रामांजनेयलु मंदिर में विशेष पूजा और हवन का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया।

मंदिर में वेद मंत्रों के साथ भगवान की पूजा की गई। इसी प्रकार ट्रंक रोड सेंटर स्थित हनुमान मंदिर में भगवान महावीर का जलाभिषेक के बाद दुग्धाभिषेक हुआ। बाद में हुई पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर भक्तों को भोजन करवाया गया। इसके अलावा बजरंग दल द्वारा मॉडर्न स्कूल से बाइक रैली निकाली गई जिसमें दल के कार्यकर्ताओं ने बढ़चढक़र भाग लिया। रैली मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।

बच्चों को सकारात्मक सोचने की कला सिखाएं

पूंदमल्ली जैन स्थानक में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा मनुष्य को अपनी मति को सम्भालनी चाहिए न कि गति। हमें अपनी बुद्धि पर नियंत्रण करना चाहिए न कि अपनी पर। कोई भी स्त्री मोक्ष पा सकती है, मंगल भाव की ऊंचाइयों को छू सकती हैं लेकिन कभी सातवीं नारकी में नहीं जा सकती। एक पुरुष जो मोक्ष भी प्राप्त कर सकता है और सातवीं नारकी में भी जा सकता है, उसका उत्थान और पत्तन दोनों संभव है। परंतु एक स्त्री यदि मोक्ष को प्राप्त करना चाहे तो कर सकती है लेकिन कभी भी इतनी क्रूर नहीं हो सकती कि सातवीं नारकी में जाना पड़े। यह माताओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को धर्म के मार्ग पर प्रशस्त करें।

उनका भविष्य सुधारें। उन्हें सकारात्मक सोचना सिखाएं। जिस प्रकार हम अपने बच्चों को बोलना, चलना, खाना सिखाते हैं, उन्हें सोना, पढऩा, लिखना सिखाते हैं लेकिन उन्हें अच्छा और सकारात्मक सोचना नहीं सिखाते। यही सबसे महत्वपूर्ण है कि हम अपने बच्चों को सही सोचना सिखाएं। यदि व्यक्ति की सोच सकारात्मक हो जाए तो न द्रव्य का असर होगा, न क्षेत्र का। जब तक हम अपना नजरिया नहीं संभालेंगे, तब तक सब कुछ संभला हुआ व्यर्थ हो जाएगा। जो परिवार अपने सदस्यों की बुरी भावनाओं से नहीं बचाता।

तो उस परिवार को अपने सदस्यों की नकारात्मक भावनाओं के दुष्परिणाम भुगतने ही पड़ते हैं। उपाध्याय प्रवर ने संसार में मां की महिमा को उद्घाटित करते हुए कहा कि बच्चे की सोच बदलने का सामथ्र्य जितना मां में है उतना संसार में किसी में भी नहीं होता। यदि मां ने अपने बच्चे की सोच को यदि बदल दिया तो उसको कोई भी नहीं बदल सकता है। सत्य में यदि वात्सल्य का रस हो तो सत्य समझ में शीघ्र आ जाता है।

सुचित्रा चोपड़ा और प्रियंका चोरडिय़ा ने अष्टमंगल शिविर के बारे में बताया। पदमचंद कांकरिया ने भी संतदर्शन का लाभ लिया एवं प्रवचन के लिए आने की विनती की। उपाध्याय प्रवर शुक्रवार को भी प्रवचन यहीं पर देंगे।

मुकेश शर्मा Reporting
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