तिरुनेलवेली बस अड्डे पर राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने हटाया कचरा

Mukesh Sharma

Publish: Dec, 07 2017 10:28:30 (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
तिरुनेलवेली बस अड्डे पर राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने हटाया कचरा

राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित तमाम आलोचनाओं के बाद भी जिलावार विकास कार्यों की सुध लेने में पूरी तरह लीन हैं। उनका ताजा दौरा तिरुनेलवेली जिले का था जहां वे मणोनमण्यम सुंदरनार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर कुलाधिपति शामिल हुए थे।

तिरुनेलवेली।राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित तमाम आलोचनाओं के बाद भी जिलावार विकास कार्यों की सुध लेने में पूरी तरह लीन हैं। उनका ताजा दौरा तिरुनेलवेली जिले का था जहां वे मणोनमण्यम सुंदरनार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर कुलाधिपति शामिल हुए थे।

इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने आए राज्यपाल ने तिरुनेलवेली बस अड्डे की सुध ली। वहां उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा भी साफ किया। इस दौरान जिला कलक्टर संदीप नंदूरी भी उनके साथ थे। उस वक्त उन्होंने जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को स्वच्छता और स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए।

उसके बाद राज्यपाल ने जिले के प्रशासकीय और पुलिस अधिकारियों के तिरुनेलवेली में चल रहे विकास कार्यक्रमों और अन्य योजनाओं का प्रजेंटेशन देखा। उस वक्त तिरुनेलवेली निगम के प्रभारी आयुक्त नारायण नायर व शहर पुलिस आयुक्त कपिल कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

राज्यपाल ने जब इसी तरह कोयम्बत्तूर में जिला प्रशासन के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की थी तब यह चर्चा का विषय बन गई थी। तमिलनाडु के समस्त विपक्षी दलों ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि यह संवैधानिक आचरण नहीं है। अब तिरुनेलवेली में की गई कार्य समीक्षा से एक बार फिर विवाद पैदा होने की आशंका है।

मौसम ने बढ़ाई मछुआरों की परेशानी

खराब मौसम के चलते जहां एक तरफ किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं वहीं बारिश ने किसानों के चेहरे पर चमक बिखेर दी है। बारिश के प्रभाव से बंद पड़े मरक्कानम, कोट्टाकुप्पम एवं पिल्लीचावड़ी मछली बाजार ने मछुआरों की आय पर ब्रेक लगा दिया है लेकिन किसान अपनी फसल की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी देखकर काफी खुश हैं। चक्रवात के डर से घर में बैठे हुए मछुआरे बेसब्री से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि समुद्र की स्थिति सामान्य हो और वे मत्स्यायन के लिए जाएं। गौरतलब है कि जिले में मछुआरों के 25 गांव हैं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लगभग 5000 परिवारों की आजीविका मत्स्यायन पर ही निर्भर है।

मौसम की वजह से किसी भी प्रकार के नुकसान से बचान के लिए लगभग 1000 नावों एवं मछली उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया था लेकिन मौसम के बारिश की गति धीमी पड़ते ही कुछ मछुआरों ने समुद्र में जाने का निर्णय लिया।

हालांकि लहरों से टकराने की वजह से पुदुचेरी के मूर्तिकुप्पम निवासी सुमन (32) को त्रासदी का सामना करना पड़ा लेकिन अन्य नावों को सुरक्षित बचा लिया गया।
इसी प्रकार एक्कियाकुप्पम निवासी नागूरान, डेसापैन एवं कुमारन भी छोटी नाव से मछली पकडऩे के लिए गए थे लेकिन लहरों ने उनकी नाव को पलट दिया। इस दुर्घटना में इन तीनों को तो सुरक्षित बचा लिया गया लेकिन लाखों रुपए का मछली पकडऩे का जाल बर्बाद हो गया।

कोट्टूकुप्पम के एक मछुआरे मुत्थु ने कहा कि अगर प्रतिबंध काल के दौरान वे चक्रवात या बहाव से सीधे प्रभावित हुए होते तो उन्हें सरकारी मदद मिलती लेकिन बारिश से प्रभावित होने पर उनको कोई मदद नहीं मिलेगी। उसने कहा कि जिस तरह भारी बारिस के दौरान किसानों को सरकारी मदद मिलती है उसी प्रकार उन्हें भी मदद मिलनी चाहिए।

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