IIT Madras में आत्महत्याओं का मामला जांच CBI को देने का सुझाव

IIT Madras में आत्महत्याओं का मामला
जांच CBI को देने का सुझाव
Plea dismiss कर किया निपटारा

चेन्नई. IIT Madras छात्रा फातिमा लतीफ की आत्महत्या के मामले से उपजे विवाद और प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को सुझाव दिया कि वह इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो ( CBI) को दे सकती है। बहरहाल, सीबीआइ जांच के आदेश जारी करने की मांग वाली याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी।

न्यायाधीश एम. सत्यनारायणन और जस्टिस आर. हेमलता की न्यायिक पीठ ने केरल की लोकतांत्रिक जनता दल की अर्जी को खारिज कर दिया। याची ने आइआइटी मद्रास में २००६ से अब तक हुईं १४ आत्महत्याओं की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की थी।

बेंच ने कहा कि सरकार ने जो आंकड़े दिए हैं वह फरवरी २००८ से नवम्बर २०१९ के बीच आइआइटी मद्रास के विद्यार्थियों व छात्रावासों में बसे १६ छात्रों ने खुदकुशी की। इसकी वजह तनाव, विविध पहलू और उनका अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाना रही। अब वह वक्त आ चुका है कि आइआइटी प्रशासन सभी विद्यार्थियों को उनके प्रत्येक कार्य तथा निर्धारित अवधि में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग दे।


बेंच का कहना है कि फेकल्टी पर भी दबाव रहता है कि वे विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करें। ऐसे में इस समस्या का यथाशीघ्र समाधान खोजा जाना चाहिए ताकि युवा जिन्दगियों की हो रही क्षति को रोका जा सके। बेंच ने यह सुझाव भी दिया कि मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग सभी शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए ताकि युवा मस्तिष्क को विश्वास में लेकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह महज सहानुभूति अथवा भावनाओं के आधार पर कोई निर्देश नहीं दे सकती है। मृतका के अभिभावक की मनोदशा और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को आदेश दिया कि वह स्थिति रिपोर्ट २२ जनवरी तक पेश करे।


दूसरी याचिका भी खारिज

मद्रास हाईकोर्ट ने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडियन (NSUI) की उस याचिका को भी निरस्त कर दिया जिसमें फातिमा लतीफ के सुसाइड की सीबीआइ जांच की मांग की गई थी। न्यायाधीश एम. सत्यनारायणन और न्यायाधीश एन. शेषसाई की न्यायिक पीठ ने एनएसयूआइ की याचिका को ठुकरा दिया। सुनवाई के वक्त सरकारी विशेष वकील ने कहा कि महत्वपूर्ण सुराग जुटाए जा चुके हैं तथा जांच भी सही दिशा में चल रही है। संज्ञेय अपराध के मद्देनजर जांच की अवधि तय नहीं की जा सकती है। याची का आरोप था कि फातिमा को धर्म के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा था साथ ही आइआइटी के प्रोफेसर ने भी उसे प्रताडि़त किया था। उसकी मौत पर राज बना है और इस वजह से कई विवाद भी खड़े हुए हैं। लिहाजा राज्य पुलिस द्वारा हो रही जांच को सीबीआइ के हवाले किया जाना चाहिए।

P S Kumar Editorial Incharge
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