अल्पसंख्यक संस्थानों में दाखिला के मामले में सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रांसिस मिशिनरीज ऑफ मेरीज के अध्यक्ष सूर्यपुष्पम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएस सुंदर ने यह फैसला दिया।

Purushotham Reddy

September, 1303:31 PM

Chennai, Tamil Nadu, India

चेन्नई. अल्पसंख्यक स्टेट्स को बनाए रखने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षण संस्थानों को ५० प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को दाखिला देने के राज्य सरकार के आदेश पर मद्रास हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रांसिस मिशिनरीज ऑफ मेरीज के अध्यक्ष सूर्यपुष्पम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएस सुंदर ने यह फैसला दिया।
सूर्यपुष्पम ने अपनी याचिका में मांग की थी कि ५ अप्रैल २०१८ को जारी इस आदेश को हाईकोर्ट रद्द कर दे। सहायता प्राप्त संस्थानों में यह हिस्सा ७५ प्रतिशत कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए याची ने कहा कि स्कूली स्तर के गैर सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान में दाखिला मामले में राज्य सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती। वहीं सहायता प्राप्त संस्थानों में राज्य सरकार अल्प संख्यक विद्यार्थियों की प्रतिशता को नोटीफाई कर सकती है। याची ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और प्रशासित संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलता है ना कि उसमें अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के दाखिले की प्रतिशता के आधार पर। अगर यह दर्जा दाखिले के आधार पर निर्धारित होगा तो हर वर्ष इसमें बदलाव आएगा। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए याची ने कहा कि स्कूली स्तर के गैर सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान में दाखिला मामले में राज्य सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती। वहीं सहायता प्राप्त संस्थानों में राज्य सरकार अल्प संख्यक विद्यार्थियों की प्रतिशता को नोटीफाई कर सकती है। याची ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और प्रशासित संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलता है ना कि उसमें अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के दाखिले की प्रतिशता के आधार पर। अगर यह दर्जा दाखिले के आधार पर निर्धारित होगा तो हर वर्ष इसमें बदलाव आएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रांसिस मिशिनरीज ऑफ मेरीज के अध्यक्ष सूर्यपुष्पम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएस सुंदर ने यह फैसला दिया।

PURUSHOTTAM REDDY
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