भाषाई भेद से कौमपरस्तों को मौका नहीं दे सरकार

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया सुझाव, जनता के समक्ष कुछ भाषाओं को वरीयता देने तथा भाषा विशेष की पैरोकार होने की छवि नहीं बनाए, इस तरह के आचरण से भाषाई कौमपरस्तों को देश में द्वेष और अशांति फैलाने का मौका मिल जाएगा।

By: MAGAN DARMOLA

Published: 21 Sep 2020, 01:22 AM IST

चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह जनता के समक्ष कुछ भाषाओं को वरीयता देने तथा भाषा विशेष की पैरोकार होने की छवि नहीं बनाए। इस तरह के आचरण से भाषाई कौमपरस्तों को देश में द्वेष और अशांति फैलाने का मौका मिल जाएगा। न्यायाधीश एन. कृपाकरण ने शुक्रवार को कहा कि जब संविधान के तहत 22 भाषाएं स्वीकृत हैं तो इन सभी भाषाओं के साथ समान व्यवहार तथा संरक्षण होना चाहिए।

तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी के सदस्य कलैलिंगम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने यह बात कही।यह संगठन देश में प्रतिबंधित है।

न्यायिक बेंच की दूसरी सदस्य जस्टिस आर. हेमलता ने साथी जज के विचारों पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि भाषा तथा उनके केंद्र सरकार को दिए सुझाव इस याचिका के लिए प्रासंगिक नहीं है। भाषा सीखना निजी पसंद से जुड़ा मामला है।

न्यायाधीश कृपाकरण ने कहा कि सरकार को साम्प्रदायिक, धार्मिक और अतिवादी कट्टरपंथियों से लोहा लेना चाहिए। सभी एजेंसियों के जरिए संदिग्ध इलाकों में नियमित अंतराल में जांंच-पड़ताल होनी चाहिए।

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