Tamilnadu: अपनी संस्कृति से जुड़कर ही हिंदी को कर सकेंगे मजबूत

हिंदी (Hindi) और अन्य भारतीय भाषाएं: नए आयाम विषयक संगोष्ठी (Seminar)

चेन्नई. दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रोफेसर अमर ज्योति ने कहा कि अपनी संस्कृति से जुडि़ए। अपनी भाषा तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ आदि से जुड़ेंगे तभी हिंदी से जुड़ पाएंगे।
वे शुक्रवार को यहां स्टेल्ला मेरिस कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में बोल रही थी। कॉलेज परिसर में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं- नए आयाम विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि आप अपनी संस्कृति से जब तक नहीं जुड़ेंगे तब तक आप हिंदी से नहीं जुड़ पाएंगे। अपनी मातृ भाषा में अनेक शब्द होंगे जो हिंदी के साथ जुड़े होंगे। ऐसे में अपनी भाषा को मातृभाषा पर बोलना, पढऩा एवं लिखना सीखेंगे तो हिंदी से आसानी से जुड़ पाएंगे।

तमिल के साथ जोड़कर हिंदी बोलिए

हिंदी को संपर्क भाषा बनाने के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि तमिलभाषी हैं तो तमिल के साथ जोड़कर हिंदी बोलिए। इससे आप हिंदी में प्रवीण होते चले जाएंगे। आप अपनी मातृ भाषा एवं हिंदी में बोलने का प्रयत्न कीजिए। जिस, भाषा को हम ज्यादा बोलते हैं, उसी की संस्कृति में हम ढलते चले जाते हैं।

प्रपत्र वाचन
मद्रास विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. पी. सरस्वती एवं लोयोला कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजशेखर, डॉ. सविता धुड़केवार, डॉ. ए. तस्लीम बानो, डॉ. जयश्री, डॉ. जयलक्ष्मी एफ. पाटिल, डॉ. हर्षलता वी. शाह, डॉ. एडिल नाचियार, डॉ. मिथिलेशसिंह, डॉ. प्रिया नायडू, डॉ. एफ. जैना बुन्निसा बेगम समेत अन्य ने प्रपत्र वाचन किया।
स्टेल्ला मेरिस कॉलेज के हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. श्रावणी ने स्वागत किया तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. ए. फातिमा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Ashok Rajpurohit
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