scripthindi diwas | दक्षिण भारत में बढ़ रहा हिंदी का प्रभाव | Patrika News

दक्षिण भारत में बढ़ रहा हिंदी का प्रभाव

श्री कन्यका परमेश्वरी कला एवं विज्ञान महिला महाविद्यालय में हिंदी दिवस समारोह

चेन्नई

Published: September 14, 2022 05:09:34 pm

हिंदी भाषा को लेकर आज भी देश के अंदर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर साल गोष्ठियां होती हैं। साहित्यिक मंच तैयार किए जाते हैं। आजादी के काफी सालों पहले से हिंदी भाषा के उत्थान के लिए काम किए जा रहे हैं। पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। दक्षिण भारत में भी हिंदी का विस्तार होता जा रहा है।
साहुकारपेट कोतवाल चावड़ी स्थित श्री कन्यका परमेश्वरी कला एवं विज्ञान महिला महाविद्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में वक्ताओं ने कुछ ऐसी ही राय़ रखी। आजादी के अमृत महोत्सव थीम पर आयोजित समारोह में वक्ताओं ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग भाषाएं बोलीं जाती हैं। मगर सभी राज्यों में हिंदी समझने और बोलने वाले लोगों की एक अच्छी खासी संख्या भी मिल जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि भारत में जहां पर कई तरह की भाषाएं, संस्कृति, त्योहार, वेशभूषा अपनाई जाती हैं। यहां पर तो हर 10 किलोमीटर में भाषा और पहनावा बदल जाता है। कुछ हद तक ये बात बिल्कुल सटीक बैठती है। दक्षिण भारत में हिंदी का प्रभाव साल दर साल बढ़ता गया है। हिंदी के बढ़ने में संस्कृति ने भी काफी अहम रोल निभाया है। दक्षिण भारत में हिंदी का प्रभाव भी बीते कुछ सालों में अच्छा खासा बढ़ा हैं।
हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य अध्ययन में प्रतिवर्ष लाखों विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। इसका लाभ उन्हें शिक्षण व्यवसाय में मिलता है। हिंदी जब तक ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, शिक्षण माध्यम, विधि, रोजगार सहित अन्य सरकारी, गैर सरकारी व्यवस्थाओं का हिस्सा नहीं बनेगी तब तक बात नहीं बनेगी। निजी व्यवसाय तथा निजी कार्यों में भी अधिकांश कार्य अंग्रेजी माध्यम में ही चल रहा है। रोजगार के हिस्से में हिंदी को जिस रूप में बढ़ना चाहिए था, वह अभी शेष है। इसके लिए जरूरी है कि गंभीर मंथन हो और अमल की दिशा में कदम बढ़ाए जाएं।
हिंदी दिवस समारोह की मुख्य अतिथि डी.जी. वैष्णव कॉलेज में हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ हर्ष लता शाह थी। इस अवसर पर तीन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रथम प्रतियोगिता थी मोनो एक्ट। छात्राओं ने इस प्रतियोगिता में महिला स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका निभाई। दूसरी प्रतियोगिता वेदर फोरकास्ट थी। तीसरी प्रतियोगिता सामूहिक नृत्य था। सामूहिक नृत्य का थीम था 'अमृत काल'। मुख्य अतिथि ने सभी छात्राओं का उत्साहवर्धन किया और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। श्री कन्यका परमेश्वरी कला एवं विज्ञान महिला महाविद्याल की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ पी. बी. वनीता ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।
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