चेन्नई प्रवासी हुकमाराम गोदारा ने राजस्थान में खोला कपास का प्लान्ट, किसानों से सीधे कपास खरीद बिचौलियों से दिलाई मुक्ति,

राजस्थान मूल के चेन्नई प्रवासी हुकमाराम गोदारा ने राजस्थान में खोला कपास का प्लान्ट, किसानों से सीधे कपास खरीद बिचौलियों से दिलाई मुक्ति, चालीस लोगों को रोजगार भी दिया

By: Ashok Rajpurohit

Published: 16 May 2021, 08:55 PM IST

चेन्नई. अगर इरादे बुलंद हो और मन में कुछ नया करने का संकल्प हो तो चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो, मंजिल हासिल करने से कोई रोक नहीं सकता। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपने आत्मबल एवं सकारात्मक सोच के बूते आपदा को अवसर में बदल दिया। विपरित हालात के बावजूद चुनौतियों को पार करते हुए अपनी मंजिल तय की। यानी अगर हमारी संकल्प शक्ति यदि मजबूत हो तो हम कुछ भी कर सकते हैं। कुछ ऐसा ही करके दिखाया राजस्थान मूल के चेन्नई प्रवासी हुकमाराम गोदारा ने। पिछले साल लॉकडाउन से कुछ पहले उन्होंने राजस्थान के जोधपुर जिले के पूनासर में कपास का प्लान्स खोला। आसपास के किसानों से सीधे कपास खरीदा जिससे किसानों को बिचौलिओं का सहारा लेने की जरूरत नहीं रही। चालीस लोगों को रोजगार भी दिया।
आसपास के किसानों को मिला फायदा
मूल रूप से नागौर जिले के कु़ड़छी निवासी हुकमाराम गोदारा लम्बे समय से चेन्नई में पॉन ब्रोकर (गिरवी की दुकान) का व्यवसाय कर रहे हैं। वे साल में 2 से 3 बार चेन्नई से अपने गांव जाते हैं। उन्होंने देखा कि आसपास के किसानों को बिचौलियों के जरिए अपनी फसल बेचनी पड़ती है। वे खुद एक किसान परिवार से आते हैं। ऐसे में उन्होंने पिछले साल लॉकडाउन से कुछ पहले अपने गांव से करीब तीस किलोमीटर दूर पूनासर गांव में बीस बीघा जमीन पर श्री पंचमुखी बालाजी कपास मिल खोली। इसके लिए जगदीश खीचड़ एवं सोहनराम जाजड़ा को भी सहभागी बनाया। इससे करीब चालीस लोगों को रोजगार भी मिला।
फसला का मिला पूरा पैसा
गोदारा कहते हैं, आसपास के इलाके में कपास की अच्छी खेती होती है। किसान सीधे यहां आकर कपास बेच कर भुगतान प्राप्त कर लेते हैं। कपास से गांठें बनाई जाती है। खल व तेल भी निकलता है। हाल ही में सरसों का प्लान्ट भी लगाया है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता था। ऐसे में बिक्री का एक बड़ा हिस्सा बिचौलियों की जेब में चला जाता था। अब किसान अपनी फसल सीधे बेच रहे हैं और ऐसे में उन्हें फसल का पूरा पैसा मिलने लगा है। रोजाना करीब 15 से 20 किसानों को फायदा मिल रहा है। सरकारी दर पर समर्थन मूल्य पर भी खरीद कर रहे हैं जिससे किसानों के बैंक खाते में पैसा जमा हो जाता है।
कपास की तरफ बढा रुझान
गोदारा कहते हैं, इन दिनों लॉकडाउन में कई किसानों की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। उन्हें मदद भी दिलाई गई। किसानों को कपास की फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए भी लगातार जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे पहले इलाके में मूंगफली की पैदावार होती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से किसानों का रुझान कपास की तरफ बढ़ा हैं।

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