सैकड़ों ने सुना नववर्ष दीपावली महामांगलिक

सैकड़ों ने सुना नववर्ष दीपावली महामांगलिक

Ritesh Ranjan | Publish: Nov, 10 2018 12:23:34 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 12:23:35 PM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

- कपिल मुनि ने समझाया उत्तराध्ययन सूत्र का महत्व

चेन्नई. गोपालपुरम स्थित छाजेड़ भवन में कपिल मुनि के सान्निध्य व श्री जैन संघ गोपालपुरम के तत्वावधान में गुरुवार को भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक, श्री गौतम स्वामी केवल कल्याणक और आर्य सुधर्मा स्वामी पट्टआरोहण महोत्सव के प्रसंग पर नववर्ष दीपावली महामांगलिक का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत भगवान महावीर की अंतिम वाणी श्री उत्तराध्ययन सूत्र के पारायण के साथ गौतम स्वामी और पंच परमेष्ठी की स्तुति से हुई। श्रद्धालुओं द्वारा समवेत स्वरों में संगान से वातावरण भक्तिमय हो गया।
कपिल मुनि ने कहा कि भगवान महावीर ने कार्तिक अमावस्या को अपने सम्पूर्ण योगों का संवरण करके अयोगी अवस्था को प्राप्त करते हुए मोक्ष को प्राप्त किया। मुक्ति गमन के पूर्व प्रभु ने प्राणी मात्र के प्रति अनुकंपा का परिचय देते हुए 16 प्रहर तक अपनी देशना को निर्झर प्रवाहित किया। उस देशना के संकलन का नाम ही उत्तराध्ययन सूत्र है। प्रत्येक वर्ष प्रभु के निर्वाणोत्सव के प्रसंग पर इस आगम के वाचन की स्वस्थ परम्परा चली आ रही है। प्रभु महावीर के अनुयायी को अहोभाव से श्रद्धापूर्वक इसका श्रवण और यथाशक्ति आचरण करके प्रभु के प्रति श्रद्धा का अघ्र्य समर्पित करना चाहिए। भगवान की वाणी में जीवन निर्माण के सूत्रों का उल्लेख किया गया है। जीवन के प्रति जागरूक व्यक्ति को इसके स्वाध्याय का संबल लेकर साधना पथ और जीवन पथ को आलोकित करके आध्यात्मिक तरीके से दिवाली मनाएं। अंतर्मन के दीपक में उत्साह, उमंग और सही सोच और वास्तविक सुख शांति की लौ को निरंतर प्रज्वलित बनाये रखने के लिए प्रभु वीर का ध्यान करना जरूरी है।
मुनि ने कहा कि भगवान महावीर का स्मरण और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के महासागर में गोता लगाने से व्यक्ति को सभी तरफ से भय मुक्त बनाता है। वर्तमान में श्वेताम्बर परंपरा में जो आगम साहित्य उपलब्ध है वह गणधर आर्य सुधर्मा स्वामी के अनुग्रह से जिनशासन को अनुपम देन है। भगवान महावीर के निर्वाण के बाद उन्हें संघ संचालन का दायित्व सौंपा गया। जिसे 20 साल तक कुशलता के साथ निर्वहन करके उन्होंने जिनशासन की भरपूर सेवा की ।
मुनि ने उद्बोधन के बाद वीर निर्वाण संवत 2545 के आरम्भ के अवसर पर जैन धर्म के प्रभावशाली स्तोत्र, छंद और मंत्रोच्चार के साथ महामांगलिक प्रदान किया जिसका श्रद्धापूर्वक बड़ी संख्या में उमड़े श्रावक श्राविकाओं ने श्रवण किया। इस मौके पर मुनि ने सभी के आध्यात्मिक जीवन की उन्नति और खुशहाली की शुभ कामना देते हुए अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। संघ अध्यक्ष अमरचंद छाजेड, संरक्षक सुभाषचंद रांका व अन्य ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संघ मंत्री राजकुमार कोठारी ने किया।

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