आईआईटी मद्रास के स्टार्टअप ने तैयार किया पोर्टेबल कोविड-19 अस्पताल

 

-चिकित्सक, मेडिकल कक्ष, आईसीयू व बैड की सुविधायुक्त
-केरल के वायनाड में पहले से ही तैयार

By: Ashok Rajpurohit

Published: 17 Jul 2020, 10:17 AM IST

चेन्नई. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटीएम) के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप मोडुलस हाउसिंग ने एक ऐसा पोर्टेबल अस्पताल तैयार किया है जिसे चार आदमी मात्र दो घंटे में कहीं भी स्थापित कर सकते हैं। इसे मेडिकेब नाम दिया गया है। इस पोर्टेबल माइक्रोस्ट्रक्चर के जरिए स्थानीय समुदाय में कोविड-19 संक्रमित की पहचान करने, जांच, आइसोलेट व इलाज की सुविधा दी जा सकेगी।
हाल ही केरल के वायनाड जिले में मेडिकेब लांच किया गया जहां इस इकाई के जरिए कोरोना संक्रमितों की जांच होगी। यह स्टार्टअप माइक्रो अस्पताल विकसित कर रहा है जो देशभर में तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं। मेडिकेब फोल्डेड है और यह चार जोन में बंटा हुआ है। इसमें एक चिकित्सक का कमरा, एक आइसोलेशन कक्ष, एक मेडिकल-वार्ड कक्ष और एक दो बिस्तर का आईसीयू है।
स्टार्टअप ने श्री चित्रा तिरुनल इन्स्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी से साझा किया है जो इस प्रोजेक्ट के सर्टिफिकेशन व चलन में मदद करेगी। आईआईटी के दो पूर्व छात्रों की ओर से स्थापित किए इस मोडुलस हाउसिंग को आईआईटी मद्रास की इन्क्यूबेशन सेल सपोर्ट कर रही है। इन्होंने कोविड-19 से लड़ाई के लिए यह विशेष रूप से तैयार किया है।
नवाचार पर जोर
मोडुलस हाउसिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीराम रविचन्द्रन ने कोविड-19 के लिए नवाचारों के तहत इस तरह के कार्य पर जोर देते हुए कहा कि केरल में इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम में प्रौद्योगिकी और माइक्रो अस्पताल के फायदे साबित करने में मदद मिल सकेगी। यह चार लोगों की मदद से मात्र दो घंटे में तैयार किया जा सकता है। इसे समेटने के बाद यह पांच गुना कम जगह घेरता है और इसलिए परिवहन में भी काफी आसानी हो जाती है।
ग्रामीण इलाके के लिए मददगार
उन्होने कहा कि मौजूदा समय में इस महामारी से लडऩे के लिए बुुनियादी ढांचा खासा महत्व रखता है। कोविड-19 जैसी महामारी के लिए लोगों को उपचार के साथ स्वस्थ स्वास्थ्य अवसंचरना का होना जरूरी है। शहरी क्षेत्रों के उलट गांवों में बुनियादी ढांचा इतना मजबूत नहीं है। ग्रामीण आबादी का घनत्व अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में इस तरह के लघु अस्पताल कोविड-19 के मामलों को निपटाने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करना आसान
मोडुलस दोहरे डिजाइन पर काम करता है। जहां इसे तेजी से कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया जा सकता है वहीं ग्रामीण इलाके जहां स्वास्थ्य की जरूरत अधिक है, इसे माइक्रो अस्पताल या क्लिनिक में बदल सकते हैं। मोडुलस हाउसिंग ने चेन्नई के पास चेंगलपेट में इसकी उत्पादन इकाई स्थापित की है।
भारत में प्रति एक हजार लोगों पर 0.7 बैड की सुविधा है। मेजिकैब जैसी नवाचार भारत में स्वास्थ्य सेवा के ढांचे को मजबूत करने में मददगार बनेगी। इसे कम समय में कहीं भी स्थापित किया जा सकता है।
कहीं भी ले जाने में आसान
मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. तमस्वती घोष कहते हैं, हमें अपने स्टार्टअप पर खुशी है जो कोविड-19 के खात्मे के लिए काम कर रहे हैं। एन-95 मास्क, वेन्टीलेटर्स, टेस्टिंग किट आदि पोर्टेबल अस्पताल का हिस्सा है। वे हालात के अनुसार कहीं भी ले जाए जा सकते हैं। इस चुनौती के समय में स्टार्टअप को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इण्डस्ट्री के सहयोग से इन्हें और गति मिल सकेगी।

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