सांस रोकने से बढ़ सकती है कोविड 19 संक्रमण की संभावना

आईआईटी मद्रास का अध्ययन
- लो ब्रीथिंग फ्रीक्वेंसी से वायरस से भरे बूंदों के फेफड़ की गहराई तक जाने की प्रक्रिया में वृद्धि

By: Santosh Tiwari

Published: 11 Jan 2021, 09:49 PM IST

चेन्नई.
आईआईटी मद्रास के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सांस रोककर रखने से कोविड 19 संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि लो ब्रीथिंग फ्रीक्वेंसी से वायरस से भरे बूंदों के फेफड़ की गहराई तक जाने की प्रक्रिया बढ़ जाती है। यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है कि लोग अक्सर जल्दी सांस लेते हैं एवं भीड़ भाड़ वाले इलाकों में वायरस से बचने के लिए सांस रोकते हैं। इस घटना के फिजिक्स की समझ इस रोग की प्रसार को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रयोगशाला में लो ब्रीथिंग फ्रीक्वेंसी की माडलिंग पर शोधकर्ताओं ने पाया कि फेफड़े में वायरस के रुकने का समय बढ़ जाता है। इसके फलस्वरूप कोविड 19 संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। यह शोध अप्लायड मेडिसींस विभाग के अर्णब कुमार मल्लिक एवं सौमाल्या मुखर्जी द्वारा किया गया जिसका नेतृत्व महेश पंचग्नुला ने किया। इस अध्ययन के प्राप्त नतीजें इन्टरनेशनल पीअर-रीभिव्ड जनर्नल फिजिक्स आफ फ्लुइड्स में प्रकाशित हुए हैं।
पंचग्नुला ने कहा कि कोविड 19 ने गहरे पल्मोनोजिकल सिस्टमेटिक रोगों की हमारी समझ में एक अंतर को सामने लाया है। हमारे अध्ययन ने इस रहस्य को सामने लाया है कि कैसे कणों का परिवहन होता है और वे फेफड़े में गहरे तक जमा होते हैं। अध्ययन में उस फिजिकल प्रक्रिया को दिखाया गया है जिससे एयरोसोल कण फेफड़े की गहराई तक जाते हैं। वायुजनित संक्रमण जैसे कोरोना वायरस झींकने एवं खांसने से फैलता है क्योंकि इससे तुरंत बड़ी संख्या में छोटे बूंद निकलते हैं।
शोधकर्ताओं ने छोटे कैपिलरीज में ड्राप्लेट्स (बूंद) मुवमेंट के अध्ययन द्वारा फेफड़े में ड्राप्लेट डाइनेमिक्स का नकल किया। इनका डायमीटर फेफड़े के श्वासनली के समान था। इसके बाद उन्होंने फ्लोरोसेंट कणों के साथ पानी को मिलाया एवं नेबुलाइजर का उपयोग कर इस द्रव से एयरोसोल बनाया। इन फ्लोरोसेंट एयरोसोल का उपयोग कर कैपिलर में कणों के जमाव एवं गतिशीलता को ट्रैक किया गया।
बेहतर थेरेपी का हो सकेगा विकास
इस अध्ययन से बेहतर थेरेपी विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही श्वसन संक्रमण के लिए दवाएं बनाई जा सकेंगी।

Santosh Tiwari Desk
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