देश में बीस साल की उम्र के 51 फीसदी पुरुषों व 65 फीसदी महिलाओं को मधुमेह का खतरा

देश में बीस साल की उम्रके 51 फीसदी पुरुषों व 65 फीसदी महिलाओं को मधुमेह का खतरा
- मोटापे से ग्रस्त लोगों में जोखिम अधिक
-एक शोध में आया सामने

By: Ashok Rajpurohit

Published: 01 Dec 2020, 06:24 PM IST

चेन्नई. भारत में बीस साल की उम्र में मधुमेह होने की संभावनाएं तेज होने लगी है। जो ताउम्र बनी रह सकती है। एक शोध में खुलासा हुआ है कि इस उम्र में देश के करीब 51 फीसदी पुरुषों तथा 65 फीसदी महिलाओं में मधुमेह विकसित होने लगता है। इनमें से करीब 95 फीसदी में टाइप-2 मधुमेह हो सकता है। यूरोपियन एसोसिएशन फॉर दि स्टडी ऑफ डायबीटिज के आधिकारिक जरनल डायबेटोलोजिया में इस शोध का प्रकाशन हुआ है।
इस टीम में भारत, यूके व यूएसए के लेखक शामिल रहे। जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज यूके के पब्लिक हैल्थ एंड प्राइमरी केयर विभाग के डॉ. शम्मी लुहार तथा मद्रास डायबीटिज रिसर्च फाउण्डेशन चेन्नई के निदेशक एवं अध्यक्ष तथा डॉ. मोहन्स डायबीटिज स्पेशियलिटिज सेन्टर के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन और ऑल इंडिया इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के डॉ. निखिल टंडन शामिल रहे।
मधुमेह से जूझ रहा भारत
भारत पहले से मधुमेह की बीमारी से जूझ रहा है। देश में 77 मिलियन लोग मधुमेह से ग्रस्त है। विशेषज्ञों ने 2045 से मधुमेह से पीडित लोगों की संख्या 134 मिलियन का अनुमान जताया है। शोध में भारत के शहरों में मधुमेह को लेकर चेतावनी दी गई है। मधुमेह के कई कारकों को शामिल करते हुए इसे काफी खतरनाक बताया गया है। मधुमेह के मुख्य कारणों में खानपान की गुणवत्ता में कमी, शारीरिक अभ्यास नहीं करने तथा शहरीकरण बताया है।
नकारात्मक इम्पैक्ट
अध्ययन में यह बात सामने आई कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में नकारात्मक इम्पैक्ट देखने को मिला। शहरों में रहने वाले मोटे लोगों में जीवनभर जोखिम रहता है। यह जोखिम 20 साल की महिलाओं में 86 फीसदी तथा पुरुषों में करीब 87 फीसदी पाई गई। जिनकी बीएमआई सामान्य या कम है उनमें 20 साल के पुरुषों में कम या सामान्य वजन वाले पुरुषों में 41.2 फीसदी तथा कम या सामान्य वजन वाली महिलाओं में 51.6फीसदी जोखिम है।
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मोटे लोगों में अधिक जोखिम
भारत के महानगरों में मधुमेह के चलते अक्सर जीवन भर जोखिम बना रहता है। खासकर मोटे लोगों में मधुमेह की संभावनाएं भी अधिक बनी रहती है। शोध में यह बातें विशेष रूप से सामने आई है।
- डॉ. वी. मोहन, चेयरमैन, डॉ. मोहन्स डायबीटिज स्पेशियलिटीज सेन्टर एवं निदेशक, मद्रास डायबीटिज रिसर्च फाउण्डेशन, चेन्नई।
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