प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi कैसे चलाएंगे चीनी समकक्षी पर अपना जादू... पढ़ें पूरी खबर

प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi कैसे चलाएंगे चीनी समकक्षी पर अपना जादू... पढ़ें पूरी खबर
NARENDRA MODI-प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर बनाया जाएगा 7000 किलो का केक

P.S.Vijayaraghavan | Updated: 09 Oct 2019, 06:09:38 PM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

PM Narendra Modi और Xi Jinping के बीच Informal Summit
Sabarmati के बाद अब Mahabalipuram तट से तैयार होगी मजबूत रिश्तों की जमीन
India और Chinaके बीच Bilateral संबंध होंगे मजबूत

पी. एस. विजयराघवन


चेन्नई. कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति पर पाकिस्तान के दुनियाभर में भारत के खिलाफ वातावरण तैयार करने की नाकाम कोशिशों के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में अगवानी करेंगे। कहने को तो यह अनौपचारिक शिखर वार्ता द्वितीय है लेकिन इसके कूटनीतिक और आर्थिक मायने अत्यंत व्यापक हैं। दोनों नेताओं के बीच अप्रेल २०१८ में ऐसी पहली वार्ता चीन के वुहान में हुई थी। कश्मीर मसले पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के चीन से बैरंग लौटने के बाद इस अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है।


महानगर से ५० किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर बसा अतिप्राचीन ऐतिहासिक नगर माम्मलपुरम (महाबलीपुरम) जिनपिंग के स्वागत में सज चुका है। यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है जिससे इस पर्यटन स्थल की रंगत व खूबसूरती और बढ़ गई है। जानकारों के अनुसार चीन के राष्ट्रपति के आगमन से द्विपक्षीय व्यवहार और संबंधों में मजबूती आएगी।


सरहद पर चर्चा
कूटनीतिक दृष्टि से सरहद को लेकर अवश्य चर्चा होगी। फिर चाहे वह अरुणाचल प्रदेश के डोकलामा की बात हो या कश्मीर घाटी की। चीनी मामलों के जानकार और सुराणा एंड सुराणा एटॉर्नीज इंटरनेशनल के सीईओ विनोद सुराणा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच सरहद विवाद पर चर्चा अवश्य होगी। यह सही वक्त होगा जब भारत अपनी चिंताएं चीन के समक्ष रखे। भारत के पड़ोसी देशों मसलन पाकिस्तान, श्रीलंका, भूटान, म्यांमार और मालदीव के साथ मिलकर जहां चीन खुद को मजबूत कर रहा है तो भारत को भी कूटनीतिक उपायों से तिब्बत, जापान, ताइवान व कोरिया के जरिए अपनी मजबूती दिखानी होगी।


बढ़ता व्यापार घाटा
वे कहते हैं कि हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नकाब अब उतर चुका है। १९६२ जैसी परिस्थितियां अब नहीं रही। चीन संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता नहीं चाहता है तो वह न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भी भारत को नहीं चाहता। दोनों नेताओं के बीच इस विषय पर मंत्रणा अवश्य होगी। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा १६ बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। ऐसे में चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों में सुधार की आवश्यकता है। वैसे दोनों देशों के बीच २०१८ में तत्कालीन विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज के कार्यकाल में दस क्षेत्रों में आपसी सहयोग और एक्सचेंज प्रोग्राम पर दस्तखत हुए थे जिनको संभवत: आगे बढ़ाया जाएगा।


शिव मंदिर और चीनी छाता
तमिलनाडु और चीन के बीच करीब दो हजार साल पहले भी कारोबारी संबंध होने के कई प्रमाण मौजूद हैं। महाबलीपुरम पल्लव शासनकाल में बंदरगाह था जहां पर खुदाई के वक्त चीन के अतिप्राचीन सिक्के और मिट्टी के बर्तन मिले थे। इतिहासकारों के अनुसार सम्राट राजराज चोलन के काल में चीनी समकक्ष के आग्रह पर व्यापारिक व्यवहारों के लिए तमिलनाडु से एक प्रतिनिधिमंडल वहां भेजा गया था। चीन में शिव मंदिर है जहां का एक शिलालेख तमिल लिपि में है। तिरुपुर के एक शिव मंदिर के शिलालेख में चीनी छाते का उल्लेख प्राप्त है। संभवत: इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में चीन के राष्ट्रपति की अगवानी करने का निर्णय किया। ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में भी शी जिनपिंग से नई दिल्ली की बजाय अहमदाबाद में मुलाकात की थी। उन्होंने जिनपिंग को साबरमती आश्रम और रिवर फ्रंट की भी यात्रा कराई थी।

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