टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने की तमिलनाडु में सालभर पहले ही मुखर हो चुकी थी आवाज

चीनी वीडियो ऐप टिकटॉक लोगों के बीच खासा पापुलर रहा है। केन्द्र ने भले ही अब इस पर एक्शन लिया हो लेकिन तमिलनाडु ने एक साल पहले ही इस पर प्रतिबंध लगाने को लेकर आवाज मुखर कर दी थी।

By: Ashok Rajpurohit

Published: 30 Jun 2020, 11:59 PM IST

चेन्नई. चीनी वीडियो ऐप टिकटॉक लोगों के बीच खासा पापुलर रहा है। केन्द्र ने भले ही अब इस पर एक्शन लिया हो लेकिन तमिलनाडु ने एक साल पहले ही इस पर प्रतिबंध लगाने को लेकर आवाज मुखर कर दी थी। पिछले साल मद्राई हाईकोर्ट में इस पर प्रतिबंध को लेकर जनहित याचिका लगाई गई थी, तब न्यायालय ने भी कहा था कि इससे युवा वर्ग अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं और उनको अपने कर्तव्य से विमुख कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि संबंधित अधिकारी ऐसा कार्य करें कि यह बच्चों की पहुंच से दूर हो सके। बाद में चीनी मोबाइल ऐप ने सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया। कई लोगों का यह भी कहना था कि यह ऐप लोगों के तमिल कल्चर को प्रभावित कर रहा है। इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। इससे कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इस ऐप के माध्यम से अन्य तरह की गतिविधियों के बढ़ावा दिए जाने की बातें सामने आई थी।
पीएम की स्वदेशी मुहिम को मिलेगा बढ़ावा
अब सोमवार को केन्द्र ने टिकटॉक समेत चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया। इससे युवा वर्ग में जरूर निराशा हुई, लेकिन अधिकांश लोगों ने केन्द्र के इस निर्णय को सराहा है। उनको लगा कि अब एक अलग तरह से भारतीय ऐप की तरफ भी लोगों का झुकाव बढ़ सकेगा। अब नए ऐप भी बाजार में आने लगे हैं। प्रधानमंत्री की स्वदेशी की मुहिम को भी अब गति मिल सकेगी। कई नए स्टार्टअप को भी इससे फायदा होगा। उनकी प्रतिभा उभर सकेगी।

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