पेश करता है समृद्ध विरासत की बानगी

सवारी डिब्बा कारखाना (आईसीएफ) स्थित चेन्नई रेल म्यूजियम भारतीय रेलवे के गौरवशाली अतीत की बानगी पेश करता है। विलीवाक्कम के निकट स्थित इस म्यूजियम के प्

By: मुकेश शर्मा

Published: 20 Jan 2018, 10:03 PM IST

चेन्नई।सवारी डिब्बा कारखाना (आईसीएफ) स्थित चेन्नई रेल म्यूजियम भारतीय रेलवे के गौरवशाली अतीत की बानगी पेश करता है। विलीवाक्कम के निकट स्थित इस म्यूजियम के प्रति स्कूली विद्यार्थियों व बच्चों में विशेष आकर्षण है। इसमें विद्यार्थियों को रेलवे की कार्यप्रणाली की जानकारी मिलती है। पुराने जमाने में कैसे रेलवे काम करता था, इससे उनका साक्षात्कार होता है। सिग्नलिंग व ट्रैक में बदलाव तथा गाडिय़ों को रोकने और जाने देने के संकेत के बारे में वे प्रायोगिक तौर पर जानते हैं। फोटोग्राफ के जरिए देशभर में रेलवे की एक से बढक़र एक तकनीकी तथा प्रौद्योगिकीय उपलब्धि से आगंतुक अवगत होंगे। बच्चोंं के लिए यहां ट्वाय ट्रेन है जिस पर बैठकर वे पूरा म्यूजियम देख सकते हैं।

6.25 एकड़ में फैले इस म्यूजियम की शुरुआत 16 अप्रैल 2002 को हुई थी। 22 अगस्त 2016 को इस म्यूजियम का नाम बदलकर रीजनल रेल म्यूजियम से चेन्नई रेल म्यूजियम कर दिया गया।
यह म्यूजियम रेलवे की समृद्ध विरासत को अपने में समेटे हुए है। आईसीएफ के फर्निशिंग डिवीजन स्थित यह म्यूजियम आगंतुकों को रेलवे के तकनीकी एवं विरासत से रूबरू कराता है। यहां ब्रिटिश राज के विभिन्न दशकों के स्टीम इंजन रखे गए हंै। ऊटी ट्रेन जैसे कई पुराने कोच दर्शकों को पुराने जमाने के रेलवे की याद ताजा कराते हैं।

इतना ही नहीं अन्य अधिकांश मॉडल नार्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी द्वारा बनाए गए हैं। कुछ तो सौ साल से भी अधिक पुराने हैं। यह दक्षिण भारतीय रेलवे के इतिहास को दर्शित करते हैं। फोटो गैलरी में रेलवे के एक से बढक़र एक कोच, साज-सज्जा, सुविधाएं तथा पैलेस आन व्हील्स, गोल्डन चेरियट जैसी लक्जरी ट्रेनों की खूबसूरती देखते ही बनती है।

म्यूजियम में दो कला दीर्घाएं हैं, इनमें 1800 ईस्वी की विरासत को दिखाया गया है। दर्शक इससे आईसीएफ एवं इंडियन रेलवे के अतीत को देखते हैं। ट्रेन मॉडल एवं दुर्लभ कलाकृतियां हैं। ट्रेन सिग्नलिंग के लिए नील्स बाल टोकन सिस्टम, ट्रेन जिसमें गांधी ने यात्री की थी, म्यूजियम के खास आकर्षण हैं।

यहां 1895 में बने फोवलर स्टीम प्लॉगिंग इंजन तथा 1860 में बना डबल डेकर कोच आदि भी रखे गए हैं। पोस्टर के जरिए दुनिया भर की हाई स्पीड ट्रेनों को दिखाया गया है। रेल हेरिटेज, फोटो गैलरी, सदियों पुरानी घडिय़ां तथा डीजल लोकोमोटिव्स इंजन ब्लाक विशेष आकर्षण हैं। नीलगिरी माउंटेन रेलवे, जीएम निरीक्षण कार, पुराने जमाने के फोटोग्राफ, एमजी ईएमयू, हैंड संचालित क्रेन, विभिन्न प्रकार के इंजन हैं। चिल्ड्रन्स पार्क, स्मारिका प्रदर्शनी के जरिए दर्शक कारखाने की शुरुआत, वृद्धि एवं विकास की यात्रा करते हैं।

कोच रेस्टोरेंट बनाने की योजना

आगामी दिनों में यहां एक कोच रेस्टोरेंट के साथ ही एक मवी हाल भी बनाया जाएगा जिसमें 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। साथ ही हरी घास के मैदान, प्रकाश की व्यवस्था, सिग्नल यंत्र में सुधार किया जाएगा। शनिवार एवं रविवार को यह म्यूजियम रात को भी खुला रहता है। रेलवे की यहां सफाई का ठेका देने की योजना है। साथ ही म्यूजियम के जरिए पारंपरिक चीजों को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई जा रही है। - अरुण देवराज क्यूरेटर, चेन्नई रेल म्यूजियम

मुकेश शर्मा Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned