सभी जीवों के लिए कल्याणकारी होता है तीर्थंकरों का जन्म

जयधुरंधर मुनि ने कहा भगवान ऋषभदेव इस काल के प्रथम तीर्थंकर एवं आद्य धर्म प्रवर्तक थे

By: Santosh Tiwari

Published: 29 Mar 2019, 05:36 PM IST

चेन्नई. टी नगर में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा भगवान ऋषभदेव इस काल के प्रथम तीर्थंकर एवं आद्य धर्म प्रवर्तक थे। सभी जीवों पर परम उपकार करते हुए उन्होंने तीर्थ की स्थापना की जिसके द्वारा तिरा जा सकता है। उन्होंने केवल धर्म की ही शुरुआत नहीं की, कर्म युग का आरंभ करते हुए असि, मसि, कृषि का बोध सभी को दिया।

मुनि ने जन्म कल्याणक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तीर्थंकरों का जन्म सभी जीवों के लिए कल्याणकारी होता है। जब जब इस धरा पर अन्याय अत्याचार और पाप का बोलबाला बढ़ जाता है, तब तब कोई ना कोई महापुरुष इस धरती पर अवतरण लेते है। भगवान का जन्म महोत्सव 64 इंद्रों के द्वारा भी मनाया जाता है। भगवान का जन्म नाभिराजा की पत्नी मेरूदेवी की कुक्षी से हुआ। पुण्यवान आत्मा के जन्म से ही पग - पग पर ऋद्धि, सिद्धि एवं समृद्धि का वास रहता है। जीवन में भोग का नहीं त्याग का महत्व होता है।

भगवान ने भी राजपाट एवं समस्त ऐश्वर्य का त्याग करके दीक्षा अंगीकार की। दीक्षा लेने के पश्चात उन्हें 400 दिन तक आहार प्राप्त नहीं हुआ, फिर भी उन कष्टों का सामना करते हुए उसे सहन किया। जीवन में संघर्ष करने वाला ही महापुरुष बनता है। कर्म किसी को नहीं छोड़ते हैं। चाहे तीर्थंकर हो या संत हो या राजा हो या रंक हो। सभी को अपने किए हुए पूर्वकृत कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। मुनिगण यहां से विहार कर किलपॉक स्थित राजेश बोहरा के निवास स्थान में पधारेंगे एवं शनिवार का प्रवास किलपॉक के ऋषभ भवन में होगा।

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