अलग राज्य पर सियासत, बंगाल के बाद अब केरल व तमिलनाडु के बंटवारे की उठी मांग

अलग राज्य पर सियासत
- बंगाल के बाद अब केरल व तमिलनाडु के बंटवारे की उठी मांग
- तमिलनाडु के पश्चिमी क्षेत्र से कोंगु नाडु
- विभाजन पर पार्टियां लामबंद, राज्य से केन्द्र तक गूंज

By: ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Published: 19 Jul 2021, 10:49 PM IST

चेन्नई. तमिलनाडु के पश्चिम इलाके कोंगु-नाडु को अलग राज्य बनाने की चर्चाओं ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। इस तरह की अटकलें चल रही है कि केन्द्र सरकार इस क्षेत्र को एक अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का आकार देना चाहती है। इन अटकलों को पिछले दिनों नए केन्द्रीय राज्य मंत्री की प्रोफाइल जारी होने के बाद अधिक बल मिला। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राज्य के विभाजन की गूंज राज्य से केन्द्र तक सुनाई देने लगी है।
तमिलनाडु भारत के उन दक्षिण राज्यों में से एक है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ राजनीतिक घटनाओं के लिए भी हमेशा चर्चा में रहता हैं। अब भी तमिलनाडु में इसे लेकर बहस चल रही है। राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है. और एक धड़ा ये प्रचार करने में लगा है कि अब बस तमिलनाडु के टुकड़े होने ही वाले हैं और जल्दी ही कोंगु नाडु के रूप में नए राज्य की स्थापना हो जाएगी। पश्चिम बंगाल के बंटवारे की मांग के बाद अब केरल और तमिलनाडु के विभाजन की मांग उठी है। भाजपा नेताओं ने तमिलनाडु को दो हिस्सों में बांटने की मांग उठाई है। वहीं केरल के विभाजन की मांग एक छात्र संगठन ने की है।
मुरुगन के प्रोफाइल से छिड़ी बहस
तमिलनाडु के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष एल मुरुगन को केद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। उनको कोंगु नाडु तमिलनाडु का रहने वाला बताया गया। कोंगु नाडु वाली बहस की शुरुआत हुई मुरुगन की प्रोफाइल से। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बीजेपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से हर मंत्री की प्रोफाइल साझा की थी। इनमें एल मुरुगन की हिंदी वाली प्रोफाइल में तो सब ठीक था, लेकिन अंग्रेजी वाली प्रोफाइल में उनके नाम के नीचे कोंगु नाडु का जिक्र किया गया था। मुरुगन के प्रोफाइल में कोंगु नाडु लिखा देख तमिलनाडु में बहस छिड़ गई।
अलग-अलग कारणों से गठन
भारत को भाषायी राज्यों के रूप में पुनर्गठित करना पड़ा। इसके पश्चात् भी देश में कई क्षेत्रों में पृथक् राज्यों की मांग जारी रही। वर्ष 2000 में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रूप में तीन नवीन राज्यों का गठन हुआ। ये राज्य विकास की प्रक्रिया में पिछड़ने के साथ-साथ प्रादेशिक पहचान के आधार पर निर्मित हुए। 2014 में तेलंगाना के रूप में पृथक् राज्य के निर्माण के आधार में भी विकास के साथ-साथ क्षेत्रीयता का मुद्दा प्रमुख था। इन मांगों के पीछे प्रादेशिकता की भावना, साथ ही इन क्षेत्रों के विकास में अनदेखी, प्रमुख कारणों के रूप में विद्यमान है, किंतु कुछ मामलों में प्रादेशिकता की यह प्रवृत्ति राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का भी परिणाम है।
भाजपा भी पीछे हटी
तमिलनाडु के भाजपा नेता पहले तो इसके पक्ष में जोर-शोर से आवाज उठा रहे थे लेकिन फिर पीछे हट गए। तमिलनाडु के भाजपा नेताओं ने राज्य के पश्चिमी हिस्से को अलग कोंगूनाडु राज्य बनाने की मांग की। राज्य भाजपा के महासचिव के नागराजन का कहना है कि यह मांग उस भौगोलिक क्षेत्र में रहने वालों की है, भाजपा केवल उनकी आवाज बन रही है। भाजपा के तमिलनाडु अध्यक्ष के. अन्नामलै ने कहा कि भाजपा अलग कोंगु नाडु राज्य के पक्ष में नहीं है और पार्टी ने राज्य के पश्चिमी जिलों के पार्टी नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा है जिन्होंने ऐसा प्रस्ताव पारित किया था।
विपक्षी दल विरोध में
उधर डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि तमिलनाडु को कोई बांट नहीं सकता। इस तरह की बातों से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। राज्य अब एक सुरक्षित सरकार के अधीन है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के प्रमुख के एस अलगिरी ने कोंगु नाडु की मांग को कल्पना की उपज करार दिया। भाकपा (मार्क्सवादी) के नेता जी बालकृष्णन ने कहा कि बीजेपी राजनीतिक लाभ के लिए यह सब कर रही है।
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इन प्रदेशों में उठ रही अलग राज्यों की मांग
तमिलनाडु:कोंगु नाडु
कर्नाटक: तुलुनाडु, कोडुगु
पश्चिम बंगाल: गोरखालैंड, कामतापुर
राजस्थान: मत्स्य प्रदेश, मरुधरा राज्य
बिहार: भोजपुर, मिथिला
उत्तर प्रदेश: अवध, ब्रज/हरित प्रदेश/पश्चिमांचल, बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल
गुजरात: कच्छ, सौराष्ट्र
मध्य प्रदेश: बाघेलखण्ड, बुन्देलखण्ड तथा विन्ध्य प्रदेश, गोंडवाना तथा महाकोशल, मालवा
महाराष्ट्र: खानदेश, कोंकण, मराठवाड़ा, विदर्भ
मणिपुर: कूकीलैंड
ओड़िसा: कोशल
आसाम: बोडोलैंड, कार्बी आंगलोंग
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ASHOK SINGH RAJPUROHIT
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