मकान मालिक कर रहे किरायेदारों का शोषण

मकान मालिक कर रहे किरायेदारों का शोषण

Ritesh Ranjan | Publish: Sep, 03 2018 02:48:50 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

अजब दुविधा

- सरकार द्वारा दी जा रही सौ यूनिट छूट का लिया जा रहा पैसा

चेन्नई. शहर में रह रहे किरायेदार मकान मालिकों द्वारा बिजली के सब मीटर के नाम पर किए जा रहे शोषण से परेशान हैं। वे सरकार द्वारा तय दर से करीब तीन गुना तक किरायेदार से वसूल कर रहे हैं जबकि सरकार द्वारा हर मीटर पर सौ यूनिट बिजली की छूट दी जा रही है लेकिन वे इस छूट का लाभ किरायेदार को नहीं देकर स्वयं ही गटक जाते हैं। अधिक मामलों में ऐसा देखा गया है। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जे.जयललिता ने वर्ष २०१६ के विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य भर के लोगों को दो महीने में १०० यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी। चुनाव जीतने के बाद उन्होंन यह नियम लागू भी कर दिया। उसके बाद से राज्य के लोगों के बिल में १०० यूनिट बिजली मुफ्त में मिलती आ रही है। चेन्नई महानगर में प्रचंड गर्मी की वजह से घरों में चलने वाले एसी से आने वाले भारी बिल में सरकार की इस योजना से लोगों को काफी हद तक राहत भी मिलती है।
विडंबना यह है कि सरकार द्वारा मिल रही इस छूट का लाभ केवल मकान मालिक ही ले लेते हैं। उनके मकानों में रहने वाले किरायेदार इससे पूरी तरह वंचित रहते हैं। मकान मालिक किरायेदारों के लिए अलग से सब मीटर लगाते हैं और उनका अपनी इच्छानुसार प्रति यूनिट दर तय कर देते हैं जो सरकारी दर से करीब तीन गुना अधिक होती है। उनसे हर दूसरे माह चार्ज करते रहते हैं। हालांकि कुछ मकान मालिक ऐसे भी हैं जो किरायेदार को सरकार द्वारा जारी कार्ड दे देते हैं जिससे वे विद्युत विभाग की जमा खिडक़ी पर जमा करवाते हैं।
होना तो यह चाहिए कि यदि मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों को सौ यूनिट की छूट नहीं दी जाती तो उनके मीटर में आने वाले यूनिट्स का सरकारी दर पैसा चार्ज किया जाना चाहिए। उसमें किरायेदार से मीटर का किराया भी लिया जा सकता है। लेकिन वे ऐसा नहीं करते। वे सब मीटर की दर अपने हिसाब से तय कर चार्ज करते रहते हैं। इसका प्रभाव कम आय वाले लोगों पर अधिक पड़ता है।
आश्चर्य की बात यह है कि यदि किरायेदार मकान मालिक से इस बारे में सवाल करता है तो उसका यही कहना होता है यहां का यही नियम है। इतना ही नहीं यदि किरायेदार उससे सरकारी दर से पैसा चार्ज करने के बारे में कहता है तो उनका सीधा सा जवाब होता है आप दूसरा मकान देख लो जहां आपको इसका फायदा मिले।
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इनका कहना है।
पिछले तीन साल से नौकरी के कारण बेसन ब्रिज के पास भाड़े का कमरा लेकर रह रहा हूं। मकान मालिक हर प्रकार की हर सुविधा देता है लेकिन बिजली का छह रुपए प्रति यूनिट चार्ज करता है। मैं सुबह निकलकर रात को ही आता हूं। रात को सिर्फ एक पंखा चलता है इसके बावजूद दो महीने में ३०० रुपए बिजली का बिल हो पड़ता है जो कि बहुत अधिक है।
-राकेश गुप्ता, प्रवासी
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सरकार द्वारा हर मीटर पर मुफ्त मिलने वाली १०० यूनिट बिजली मकान मालिक ही गटक जाते हैं जबकि उसका लाभ किरायेदार को भी मिलना चाहिए। इतना होने पर भी वे हमसे मीटर में आने वाले यूनिट की दर सरकारी दर से दो-तीन गुना अधिक वसूलते हैं जो कि सरासर लूट है।
-राजेन्द्र कुमार, व्यासरपाड़ी जीवा
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मैं गिंडी में रहता हूं। मकान मालिक तो बहुत अच्छा है और मकान में असुविधा भी कोई नहीं है। लेकिन जहां बिजली के यूनिट्स की लागत का सवाल है वह उनकी मुंहमांगी है। वैसे सरकार द्वारा मिलने वाली हर बिल पर छूट का लाभ किरायेदार को भी मिलना चाहिए लेकिन वे वह देने के बजाय यूनिट का दुगुना-तीन गुना पैसा हमसे चार्ज करते हैं और मजबूरन हमें देना पड़ता है। अगर प्रतिकार किया तो खाली करने को कह देते हैं।
-सुनील कुमार, नौकरीपेशा
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बिजली की सरकारी दरें : एक नजर
यूनिट दर (प्रति यूनिट)
१०० मुफ्त
१०१-२०० ३.५० रुपए
२०१-५०० ४.६० रुपए
५०० से अधिक ६.६० रुपए
फिक्स चार्ज (द्विमासिक) ५०.०० रुपए
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