वाणी रत्न के समान, मिष्ट, शिष्ट और विशिष्ट बने वाणी

वाणी रत्न के समान, मिष्ट, शिष्ट और विशिष्ट बने वाणी

PURUSHOTTAM REDDY | Publish: Sep, 11 2018 11:40:40 AM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

आदमी मौन भी कर लेता है और बोल भी लेता है, वह कोई खास बात नहीं होती है, किन्तु आदमी बोलते हुए भी मौन कर ले, वह विशेष बात होती है। बोलना कोई बड़ी बात नहीं विवेकपूर्ण बोलना बड़ी बात होती है। आदमी को कटु नहीं मिष्ठभाषी बनने का प्रयास करना चाहिए।

 

चेन्नई. माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में आचार्य महाश्रमण ने ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ के क्रम में मरीचिकुमार के भव सहित सभी सोलहवें भव तक की कथा का वर्णन किया। ‘वाणी संयम दिवस’ पर आचार्य ने कहा कि वाणी एक महत्वपूर्ण तत्व है। विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम भाषा होती है। भाषा लिखित भी होती है तो मौखिक भी होती है। बोलना होता है। आदमी मौन भी कर लेता है और बोल भी लेता है, वह कोई खास बात नहीं होती है, किन्तु आदमी बोलते हुए भी मौन कर ले, वह विशेष बात होती है। बोलना कोई बड़ी बात नहीं विवेकपूर्ण बोलना बड़ी बात होती है। आदमी को कटु नहीं मिष्ठभाषी बनने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपनी वाणी को संयमित रखते हुए कठोर अथवा कटु भाषा से बचने का प्रयास करना चाहिए। वाणी में विनय हो, वह मिष्ठ हो। भाषा में अच्छे शब्दों का प्रयोग हो तो वाणी और भी सुन्दर बन सकती है। मिष्ठ के साथ भाषा शिष्ट हो तथा शिष्ट के साथ विशिष्ट हो जाए तो वह वाणी विशेष होती है।
वाणी एक रत्न है। वचन दुर्ग है और होंठ दरवाजे हैं। आदमी को सोच-समझकर बोलने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अपनी वाणी का संयम रखकर सारगर्भित और यथार्थपूर्ण बोलने के साथ ही यथासंभव मौन भी रहने का प्रयास करे तो वाणी की विशेष साधना हो सकती है। प्रवचन के बाद अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी धारणा के अनुसार आचार्य से तपस्याओं का प्रत्याख्यान किया।


माता-पिता के चरणों में चारों धाम
चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन सोमवार को कहा परमात्मा का दिव्य जिनशासन संसार के प्रत्येक आत्मा को शांति और आनंद प्रदान करता है। पर्यूषण पर्व के दिवस का एक एक दिन निकल रहा है। इस दिन में अगर मनुष्य तप, ध्यान और धर्म कर ले तो दिन सार्थक बन सकता है। जीवन के विनाश से पहले ही मनुष्य को परमात्मा के चरणों में समर्पित होकर जीवन सुधार लेना चाहिए। धर्म के मार्ग पर किसी को रुकावट नहीं बनना चाहिए। भगवान कृष्ण ने धर्म के क्षेत्र में लोगों को संबल दिया था। वेे अपने माता पिता के चरणों को ही चारों तीर्थ मानते थे। माता पिता जिनके घर में है समझो चारों धाम उनके पास है। ऐसे में लोगों को तीर्थ धाम जाने की जरूरत ही नहीं है। श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता पिता की जिस भावना से सेवा की उसी भाव से सभी को अपने माता पिता की सेवा कर अध्यात्म की ओर बढऩा चाहिए। मां बाप की सुंदर सेवा करने वाले ही मोक्ष की मंजिल पाते हैं। अपने कर्तव्य को कभी नहीं भूलना चाहिए। सागरमुनि ने कहा आचरण आत्मा को परमात्मा बना देता है लेकिन सबसे पहले श्रमण कर ज्ञान के प्रकाश को प्राप्त करना चाहिए। पर्यूषण यही संदेश लेकर आता है कि मनुष्य अपने प्रयासों से लोक के अंधेरे में उजाला करे। यह अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। इससे पहले उपप्रवर्तक विनयमुनि ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। धर्मसभा में संघ के अध्यक्ष आंनदमल छल्लाणी एवं अन्य लोग उपस्थित थे। मंत्री मंगलचंद खारीवाल ने संचालन किया। कोषाध्यक्ष गौतम दुगड़ ने बताया कि उपप्रर्वतक विनय मुनि और गौतममुनि के सानिध्य में मंगलवार को प्रवचन के बाद आचार्य शुभचंद्र के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि सभा होगी।

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