संसार में मालिक नहीं मेहमान बनकर जीवन जीएं

संसार में मालिक नहीं मेहमान बनकर जीवन जीएं

Ritesh Ranjan | Publish: Mar, 12 2019 12:34:51 PM (IST) | Updated: Mar, 12 2019 12:34:52 PM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

कपिल मुनि ने कहा जीवन तो एक समझौते का नाम है इसलिए सामंजस्य स्थापित करके ही जीवन यात्रा को तय करने में ही भलाई है।


चेन्नई. पुरुषवाक्कम में ताना स्ट्रीट स्थित जैन स्थानक में विराजित कपिल मुनि ने कहा जीवन तो एक समझौते का नाम है इसलिए सामंजस्य स्थापित करके ही जीवन यात्रा को तय करने में ही भलाई है। सबके प्रति प्रेम और मैत्री का व्यवहार और परस्पर उपकार करते हुए सबके प्रति सहयोग की भावना रखकर जीना ही सफल और सार्थक जीवन की निशानी है। सजगता और सेवा भावना से ओतप्रोत जीवन ही सही मायने में जीवन है। एक ऐसा जीवन जिसके चारों और शांति और समता का निवास होता है। इस संसार में प्रत्येक आदमी के साथ समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। व्यक्ति का पुण्य कमजोर है और कर्म भारी है। उग्र पुरुषार्थ और व्यवस्थित आयोजन करने के बावजूद जीवन प्रतिकूलताओं से घिरा रहने वाला है। जीवन के बेशकीमती पलों को यदि प्रतिकूलताओं से मुक्त होने में ही लगाते रहोगे तो धर्म आराधना के लिए नया समय कहाँ से लाएंगे ये चिंतनीय सवाल है। यदि कोई समय के अभाव को बहाना बनाकर जीवन में धर्म और संत समागम की उपेक्षा करता है तो वह इंसान जीवन का घोर अपमान करता है। आदमी दुखी इसलिए है कि ये संसार उसके लिए अनुकूल नहीं है । हम लोग सब कुछ अपने अनुकूल चाहते हैं और वैसा नहीं होने पर दुखी हो जाते हैं। वृत्ति और भावना की निर्मलता ही साधना का आधार है । इंसान की भावना ही भव का निर्माण करती है इसलिए भावना को कलुषित और दूषित बनाने वाले निमित्त ,व्यक्तिओं और वातावरण से परहेज करना ही समझदारी की निशानी है। कर्म बंधन भी व्यक्ति की वृत्ति पर निर्भर करता है।

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