जिंदगी को जिंदादिली के साथ जीएं

राष्ट्र संत ललितप्रभ महाराज ने कहा कि जीवन परमात्मा की ओर से मिला हुआ प्रसाद है। इसे शांति से जीना या अशांति से, अवसाद से जीना या आनंद से, यह हम पर नि

By: मुकेश शर्मा

Published: 09 Dec 2017, 10:06 PM IST

चेन्नई।राष्ट्र संत ललितप्रभ महाराज ने कहा कि जीवन परमात्मा की ओर से मिला हुआ प्रसाद है। इसे शांति से जीना या अशांति से, अवसाद से जीना या आनंद से, यह हम पर निर्भर है। हम काले हैं या गौरे, इसमें न तो हमारी कोई खामी है न कोई खासियत। क्योंकि चेहरे का रंग देना कुदरत का काम है, पर जीवन को किस ढंग से जीना यह हमारे संकल्प का परिणाम है। चेहरे को कितना ही चमका लो, दूसरे दिन वह पहले जैसा हो जाएगा, पर मन को थोड़ा सा चमका लिया तो पूरी जिंदगी चमक जाएगी।

संतप्रवर शुक्रवार को श्री जैन संघ कोडम्बाकम-वडपलनी द्वारा वडपलनी में आयोजित प्रवचनमाला के समापन पर श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां किसी की भी सदा एक जैसी नहीं रहती, लेकिन फिर भी जो परिस्थिति के बदलने या बिगडऩे के बावजूद मनस्थिति को बिगडऩे नहीं देता वह सदा खुश रहता है। याद रखें, दूध फटने पर वे ही लोग दुखी होते हैं जिन्हें रसगुल्ला बनाना नहीं आता। उन्होंने कहा कि आज कुंवारा भी दुखी है और शादीशुदा भी।

शादीशुदा गुस्सैल पत्नी के कारण दुखी है तो कुंवारा शादी न होने के कारण, पर जो हर स्थिति को परमात्मा के प्रसाद की तरह स्वीकार करता है उसका जीवन स्वत: शानदार बन जाता है। चिंता, क्रोध और ईष्र्या से बचें। शानदार जीवन का पहला नुस्खा देते हुए संत ने कहा कि जीवन के तीन शत्रु हैं चिंता, क्रोध और ईष्र्या। चिंता दिल को, क्रोध दिमाग को और ईष्र्या संबंधों को नष्ट कर देती है।

जब अनहोनी को किया नहीं जा सकता और होनी को टाला नहीं जा सकता तो व्यक्ति किस बात की चिंता करे। उन्होंने कहा कि माफ करना और माफी मांगना ये दुनिया के दो सबसे बड़े धर्म हैं। जिस घर में ये दो धर्म रहते हैं वहां कभी भी क्रोध का दावानल नहीं सुलगता। उन्होंने कहा कि हमें हमारे भाग्य से ज्यादा मिला है इसलिए दूसरों को जो मिला है उसे देखकर ईष्र्या मत पालिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज ने संबोधन से किया। इस अवसर पर राष्ट्र संतों पर जारी डाक टिकट का विमोचन गौतम तालेड़ा, पद्म टाटिया, वीरेन्द्रमल मेहता, कल्याणमल रांका, किशनलाल खाबिया, प्रकाश बोहरा, वईसराज रांका, बुद्धराज भंडारी और महावीर सी भंडारी द्वारा किया गया। इस दौरान प्रियदर्शन मेहता ने भी भजन गुनगुनाया। कार्यक्रम में साध्वीवृंद सुमित्रा एवं मधुस्मिता भी उपस्थित थे।

राष्ट्र संतों के शनिवार को सुबह 9.15 बजे आराधना भवन, साहुकारपेट में प्रवचन कार्यक्रम आयोजित होगा। श्री आदिनाथ जैन ट्रस्ट के महामंत्री मोहन जैन ने बताया कि राष्ट्र संतों का भव्य नगर प्रवेश रविवार को सुबह 8 बजे होगा।

इस अवसर पर सीमंधर जैन मंदिर चूलै से विराट सत्संग शोभायात्रा निकलेगी। इसी के साथ वेपेरी, अटकिंसन रोड स्थित गौतम किरण में 10 से 31 दिसम्बर तक सुबह 9.00 से 10.30 बजे तक लगातार 21 दिन तक सत्संग का महाकुंभ लगेगा जिसमें रोज 10 हजार से अधिक श्रद्धालु भाग लेंगे।

मुकेश शर्मा Reporting
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