मद्रास उच्च न्यायलय ने हस्तक्षेप से किया इंकार

मद्रास उच्च न्यायालय पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के कारणों की जांच कर रहे अरुमुगमस्वामी आयोग की जांच रोकने की याचिका को खारिज कर दिया।

By: Ritesh Ranjan

Published: 04 Apr 2019, 03:55 PM IST

चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के कारणों की जांच कर रहे अरुमुगमस्वामी आयोग की जांच रोकने की याचिका को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश आर. सुब्बैया और न्यायाधीश कृष्णनरामासामी की खंडपीठ ने आपोलो अस्पताल की याचिका पर सुनवाई करते हुए अस्पताल की 21 चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड के गठन की अपील को भी नामंजूर कर दिया। पीठ ने कहा कि आयोग ने लगभग 90 प्रतिशत जांच पूरी कर ली है। इसलिए अदालत अब आयोग के काम में हस्तक्षेप नहीं करेगी। लेकिन पीठ ने आयोग को चेतावनी दी कि वह सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों पर कायम रहे। पीठ ने कहा कि यह भी नहीं कहा जा सकता है कि मामले में आयोग द्वारा की गई टिप्पणी ही सरकार को सौंपी जाने वाली अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा होगी।
अपनी याचिका में, अपोलो अस्पताल ने दावा किया कि जयललिता का इलाज उच्च, योग्य और विशेषज्ञ डॉक्टर की मेडिकल टीम ने किया था। अस्पताल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के अस्पताल में भर्ती होने और उनके निधन के बाद भी उनके उपचार के बारे में कोई प्रश्र नहीं उठे। उनके उपचार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने मान्य किया था। हालांकि, राज्य सरकार ने उनके निधन के लगभग नौ महीने बाद जांच शुरू की। अस्पताल ने कहा कि आयोग की पूछताछ के कारण अस्पताल की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी। आयोग गवाहों की योग्यता पर सवाल उठा रहा है। जिसका विरोध करते हुए आयोग और राज्य सरकार ने तर्क दिया कि आयोग के पास मानकों के अनुसार जयललिता को दिए गए उपचार की शुद्धता की जांच करने की अधिकार है। आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अस्पताल आयोग की अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है।

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Ritesh Ranjan Reporting
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