कोर्ट में छलका Madras HC जज का दर्द, जानिए क्या है वजह

संवैधानिक प्राधिकारियों को निर्णय करना है तथा यह निर्णय शीघ्रातिशीघ्र होना चाहिए।

By: P S Kumar

Published: 16 Oct 2020, 06:59 PM IST

 

मदुरै.

सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय को यकीन दिलाया कि सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को मेडिकल कोर्स में दाखिले के आरक्षण बिल पर जब तक राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित निर्णय नहीं कर लेते इस अकादमिक सत्र (2020-21) का प्रोस्पेक्टस (प्रविवरण) जारी नहीं किया जाएगा। महाधिवक्ता विजय नारायणन ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही न्यायाधीश एन. कृपाकरण और जस्टिस बी. पुगलेंदी की खंडपीठ के समक्ष यह बात रखी।

जनहित याचिकाओं में आग्रह किया गया है कि सरकार ने इस वर्ष से मेडिकल कोर्स दाखिले में सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को साढ़े सात प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय करते हुए जो बिल विधानसभा में पारित किया है उसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए जाएं।

ये याचिकाएं मदुरै की पैरेंट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. रामकृष्णन और मेडिकल प्रत्याशी मदुरै निवासी वी. मुत्तुकुमार ने दाखिल की हैं। याचिकाओं में कहा गया है कि मेडिसिन की विभिन्न विधाओं में सरकारी स्कूलोंं के विद्यार्थियों को आरक्षण देने वाले बिल पर राज्यपाल ने एक महीने से कोई निर्णय नहीं किया है। नीट के नतीजे जल्द आने वाले हैं और उसके बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। लिहाजा इस मसले पर कोर्ट की दखल जरूरी है।

परमादेश जारी नहीं कर सकती कोर्ट
इन याचिकाओं पर बुधवार को हुई सुनवाई में सरकार से शुक्रवार को जवाब मांगा गया था। सुनवाई के वक्त एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने संविधान के अनुच्छेद २०० का संदर्भ दिया कि राज्यपाल के पास कैबिनेट द्वारा पारित बिलों पर निर्णय करने का अधिकार है। कोर्ट परमादेश (मैंडेमस) जारी नहीं कर सकती।

जज की आंख से निकले आंसू
सही वक्त पर निर्णय नहीं होने से मेडिकल पढऩे की लालसा रखने वाले सामान्य वर्ग के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों का हित खतरे में पड़ जाने से व्याकुल न्यायाधीश कृपाकरण की आंखों से आंसू झलक पड़े। जज ने कहा, यह बिल सरकारी स्कूल के छात्रों की मदद के लिए है जो गरीब और हाशिये पर बसे हैं। यह उनको एक समान मंच उपलब्ध कराएगा।

हम सभी राजनीतिक दलों की सराहना करते हैं जिन्होंने एकमत होकर इसे पारित कराया। जज ने प्रश्न किया लेकिन नीट परिणाम की घोषणा से पहले तक इस बिल पर निर्णय नहीं हुआ तो क्या इससे विद्यार्थी प्रभावित नहीं होंगे? जस्टिस पुगलेंदी ने कहा, इसी संविधान में यह भी लिखा है कि संवैधानिक प्राधिकारियों को निर्णय करना है तथा यह निर्णय शीघ्रातिशीघ्र होना चाहिए।

सरकार ने दिलाया भरोसा
एडवोकेट जनरल ने इस पर हाइकोर्ट को विश्वास दिलाया कि जब बिल पर निर्णय नहीं हो जाता दाखिले का प्रविवरण जारी नहीं किया जाएगा। सरकार का यह मत दर्ज करने के बाद न्यायिक पीठ ने सुनवाई २९ अक्टूबर के लिए टाल दी।

P S Kumar Editorial Incharge
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