सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने में कई विसंगतियां

Mukesh Sharma

Publish: Oct, 13 2017 08:45:58 (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने में कई विसंगतियां

विधानसभा में विपक्ष के नेता एम.के.स्टालिन ने गुरुवार को कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में कई विसंगतियां हैं। राज्य कैबिनेट ने बुधव

चेन्नई।विधानसभा में विपक्ष के नेता एम.के.स्टालिन ने गुरुवार को कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में कई विसंगतियां हैं। राज्य कैबिनेट ने बुधवार को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी थी।

 

इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा होगा। स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन 21,000 रुपए तथा सरकारी कर्मचारी एवं शिक्षक 21 महीने का वेतन बकाया भुगतान नहीं प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही आवास किराया एवं चिकित्सा भत्ता में उचित वृद्धि नहीं की गई है। इसके अलावा कई अन्य मुद्दे भी हैं जिससे कर्मचारी यूनियन खुश नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला मद्रास हाईकोर्ट के मदुरै खंडपीठ के निर्णय के बाद ही आया है। खंडपीठ ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का आदेश दिया था। डीएमके नेता ने कहा कि सरकार कर्मचारी एवं शिक्षक संघों के विरोध के बाद सिफारिशों को लागू करने पर सहमत हुई। कर्मचारी एवं शिक्षक संघों ने पुराने पेंशन योजना को लागू करने की मांग की थी। लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद मदुरै पीठ ने मुख्य सचिव से पेश होने को कहा था। इसके साथ ही सरकार को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया था। स्टालिन ने मुख्यमंत्री एडपाडी के.पलनीस्वामी की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार नियुक्ति नहीं कर रही। कर्मचारियों को संविदा पर रखा जा रहा है।

राज्य सरकार ने दो सप्ताह का समय मांगा

मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुरानी शिक्षा पद्धती के आधार पर पुलिस कांस्टेबल की भर्ती संबंधित नियमों में बदलाव करने का आदेश दिया है। मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आदेश दिया कि वर्ष १९७८ के बाद से पिछले ३८ सालों से हम नई शिक्षा पद्धती के अनुसार पढ़ाई कर रहे हैं तो पुलिस भर्ती प्रक्रिया में इसमें बदलाव क्यों नहीं लाया गया। मामले पर सुनवाई कर रहे न्यायाधीश हुलुवादी जी रमेश और न्यायाधीश आरएमटी टीका रमन की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि समय के बदलाव के साथ पुराने नियम निरर्थक हो गए हैं, इसलिए इनमें बदलाव की जरूरत है।

पुरानी शिक्षा पद्धती के शैक्षणिक योग्यता के आधार पर एक कांस्टेबल को पदोन्नति देने के एकल बेंच के वर्ष २०१४ के आदेश के खिलाफ राज्य के गृह विभाग और डीजीपी द्वारा दायर याचिका को बेंच ने खारिज कर दिया।

आवड़ी में बतौर इंस्पेक्टर नियुक्त सी. पिचांदी ने १९७८ में एसएसएलसी पास की थी। उनकी इस शैक्षणिक योग्यता ११+३ पर विभाग ने उन्हें पदोन्नती देने से इनकार कर दिया।
इस फैसले को पिचांदी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और एकल जज ने फैसला उसके पक्ष में सुनाया। जिसके बाद इस फैसले के विरोध में मौजूदा याचिका दायर की गई।

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