फूट रहा प्रवासी श्रमिकों का असंतोष, बेचैनी और बढ़ने लगी

पैदल निकलने की कोशिश, सरकारें नहीं कर रही स्थिति स्पष्ट, राजस्थान के लिए बस व कारों से हजारों लोग रवाना हो चुके हैं। इनको मिल रही अनुमति तथा गांव पहुंचने की सूचना मिलने से राजस्थान मूल के मजदूरों की बेचैनी और बढऩे लगी है।

By: MAGAN DARMOLA

Published: 14 May 2020, 07:19 PM IST

चेन्नई. तमिलनाडु में बसे प्रवासी श्रमिकों की व्याकुलता बढऩे लगी है। प्रतिदिन कुछ श्रमिक एक्सप्रेस का संचालन बिहार, यूपी, ओडिशा, झारखण्ड और अन्य प्रदेशों के लिए हुआ है लेकिन राजस्थान का श्रमिक वर्ग जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में फंसा है स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है।

विडम्बना यह है कि राजस्थान के लिए बस व कारों से हजारों लोग रवाना हो चुके हैं। इनको मिल रही अनुमति तथा गांव पहुंचने की सूचना मिलने से राजस्थान मूल के मजदूरों की बेचैनी और बढऩे लगी है।

प्रदेशभर की बात करें तो श्रमिक वर्ग गुरुवार को कई जगहों पर सडक़ पर उतर आया। पुलिस ने उनकी समझाइश की कोशिश की निश्चित रूप से बारी-बारी से उनको गृह क्षेत्र भेज दिया जाएगा। कुछ जगहों से श्रमिक बोरिया-बिस्तर लेकर पैदल ही गांवों के लिए निकल पड़े जिनको समझाकर वापस उनके ठहराव स्थल पर भेजा गया। इसी तरह कुछ लोगों के साइकिल पर निकलने की खबर है।

मुख्यमंत्री ईके पलनीस्वामी भी कह चुके हैं कि तमिलनाडु को आठ से दस गाड़ी ही आवंटित हुई है इसलिए त्वरित आवाजाही नहीं हो पा रही है।

इस बीच राजस्थान के जोधपुर और जयपुर को लेकर कोई भी श्रमिक एक्सप्रेस अब तक नहीं चली है। राजस्थान के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी से भी संपर्क नहीं हो पा रहा।

सीएम ने संकेत दिए थे कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री से श्रमिकों की वापसी को लेकर सहमति नहीं मिल पा रही है। श्रमिक वर्ग यह जानना चाहता है कि उनके सूबे का सीएम उनके प्रति क्या राय रखता है।

श्रमिक एक्सप्रेस चलाने को लेकर राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि तमिलनाडु सरकार इस सिलसिले में सहमति मांगती है तो निर्धारित दिशा-निर्देश के तहत अनुमति दी जाएगी।

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