कोरोना कर्मवीर: मां की ममता का 350 किमी का सफर

- ढाई साल के बच्चे को था बुखार, प्रशासन व स्वयंसेवकों ने की मदद

By: P S Kumar

Updated: 18 Apr 2020, 09:54 PM IST

चेन्नई.

मां की ममता से बढ़कर कुछ नहीं है। जब ढाई साल के बेटे के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिली तो साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर बैठी मां का दिल पिघल गया। किसी तरह बेटे से मिलने की उनकी हसरत ने लॉक डाउन के वक्त इस लम्बी संघर्षपूर्ण दूरी को सफलतापूर्वक पार किया। उनकी इस यात्रा में पुलिस, प्रशासन व गैर सरकारी संगठन के स्वयंसेवकों ने भी मदद की।

यह साहसिक यात्रा तिरुनेलवेली के मुुरुगन पुदूर गांव की रहने वाली पवित्रा (२२) की है। पवित्रा के पति मुरुगेशन निर्माण मजदूर हैं और दम्पती के ढाई साल का बेटा महेश्वरन है। गरीबी में दिन काट रहे परिवार के पालन के लिए पवित्रा संविदा श्रमिक के तौर पर ३५० किमी दूर पुदुकोट्टै चली गई।

पुदुकोट्टै में काम करते वक्त लॉक डाउन लागू हो गया जो अब तीन मई तक बढ़ चुका है। पवित्रा को पता चला कि महेश्वरन को बुखार की वजह से तिरुनेलवेली जीएच भर्ती कराया गया है। यह खबर मिलते ही तिरुनेलवेली लौटने के लिए व्याकुल हो गईं।

इस बारे में एनजीओ तुनैवन के पुदुचेरी संयोजक सेल्वा को पता चला। सेल्वा निजी तौर पर पवित्रा से मिले। पूरा मामला जानने के बाद पुलिस की अनुमति लेने की पूरी व्यवस्था की ताकि तिरुनेलवेली का सफर तय किया जा सके।
सेल्वा ने इस बारे में सोशल मीडिया में भी पोस्ट किया। कई तरह के सुझाव व मदद की पेशकश हुई। इस बीच पुलिस विभाग को भी वस्तुस्थिति का अहसास हुआ और उसने ई-अनुमति प्रदान की।

प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से कार का इंतजाम किया गया। कार में सवार पवित्रा की आंखों के आगे अपने बेटे का चेहरा घूम रहा था कि इस कार ने बीच मार्ग में मदुरै में दम तोड़ दिया। कार खराब होने की खबर मदुरै के डॉक्टर देव आनंद को पता चली।

वे तत्काल अपनी कार लेकर आए और पवित्रा को बिठाकर तिरुनेलवेली के लिए बढ़े। पवित्रा के इस सफर के बारे में तिरुनेलवेली के सहायक कलक्टर शिवगुरु प्रभाकरण को पता चला। उन्होंने सेल्वा के जरिए कार का नम्बर पता किया और मार्ग के सभी पुलिस नाकों पर खबर भिजवाकर पवित्रा की यात्रा आसान कराई।

पवित्रा शुक्रवार रात साढ़े दस बजे तिरुनेलवेली अस्पताल पहुंची लेकिन उसकी सफर खत्म नहीं हुआ था। जब पवित्रा वहां पहुंची तब तक वहां से महेश्वरन को डिस्चार्ज कर दिया गया था। पवित्रा को पता चला कि मुरुगेशन बेटे को लेकर गांव जा चुका है। फिर वे पुलिस की मदद से अपने गांव गईं और कलेजे के टुकड़े को गले लगा लिया। मां-बेटे को मिलाने की इस यात्रा में कई कर्मवीरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही हो सराहनीय है।

P S Kumar Editorial Incharge
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