हर साल बीस लाख नवजात मृत पैदा हो रहे

हर साल बीस लाख नवजात मृत पैदा हो रहे
-ए नेग्लेक्टेड ट्रेजडीः द ग्लोबल बर्डेन ऑफ स्टीलबर्थ की रिपोर्ट के अनुसार
-हर 16 सेकण्ड में एक मृत नवजात का जन्म
- शहरी की तुलना में ग्रामीण में अधिक

By: Ashok Rajpurohit

Published: 16 Oct 2020, 04:31 PM IST

चेन्नई. दुनिया में हर साल 20 लाख बच्चे मृत पैदा हो रहे हैं। इनमें से 84 फीसदी मामले निम्न व मध्यम आयवर्ग वाले देशों से हैं। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला की देखभाल में कमी या फिर प्रसव के दौरान हुई अन्य समस्याओं के चलते बच्चे मृत पैदा हो रहे हैं। ए नेग्लेक्टेड ट्रेजडीः द ग्लोबल बर्डेन ऑफ स्टीलबर्थ की रिपोर्ट के अनुसार हर 16 वें सेकण्ड में एक गर्भवती महिला 28 वें सप्ताह या उसके बाद मृत बच्चे को जन्म देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण यदि गर्भवती महिलाओं की उचित देखभाल न की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सामाजिक-आर्थिक कारण भी
इसका कारण सामाजिक-आर्थिक स्थिति है। उच्च व निम्न आय वर्ग वाले सभी देशों में शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में ऐसे मामले अधिक पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार शिशु की मौत के 50 फीसदी मामले अफ्रीका, मध्य व दक्षिण पूर्व एशिया के है। छह फीसदी माले यूरोप, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड व उत्तर अमेरिका के है। विशेषज्ञों की मानें तो चिकित्सा के जरिए ऐसी स्थिति को रोका जा सकता है। यदि गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी जाएं तो शिशु की मौत के मामले नियंत्रित किए जा सकते हैं। गर्भावस्था के 28 वें सप्ताह या उसके बाद गर्भस्थ शिशु की मौत के 40 फीसदी से अधिक मामले बच्चे को जन्म देने के समय होते हैं।
84 फीसदी निम्न व मध्यम आय वर्ग वाले देशों के
दुनिया भर में मृत पैदा होने वाले 20 लाख बच्चों में से 84 फीसदी मामले निम्न व मध्यम आय वर्ग वाले देशों के हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समूची दुनिया में हर 16 सेकण्ड में एक मां को यह त्रासदी झेलने को विवश होना पड़ रहा है। इसका असर उसके सामाजिक, आर्थिक व मानसिक स्तर पर पड़ता है।
समय पर देखभाल से लाई जा सकती है कमी
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था से ऐसे मामले कम किए जा सकते हैं। साथ ही प्रसव के समय उचित देखभाल व निगरानी भी मौत के मामलों में कमी लाने में मददगार बन सकती है। यह एक ऐसी त्रासदि है जिसे अमूमन हर परिवार चुपचाप झेलने को मजबूर हो जाता है। गर्भावस्ता व बच्चे के जन्म के समय भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से ऐसे मामलों को कम किया जा सकता है।

Ashok Rajpurohit
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