मुख्यमंत्री से अब कोई मतभेद नहीं : ओपीएस

Mukesh Sharma

Publish: Oct, 13 2017 05:28:13 (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
मुख्यमंत्री से अब कोई मतभेद नहीं : ओपीएस

उप-मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री एडपाड़ी के. पलनीस्वामी के साथ राजनीतिक खींचतान की रिपोर्ट से इनकार करते हुए कहा कि वे लोग एक साथ हैं और

चेन्नई।उप-मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री एडपाड़ी के. पलनीस्वामी के साथ राजनीतिक खींचतान की रिपोर्ट से इनकार करते हुए कहा कि वे लोग एक साथ हैं और उनमें किसी प्रकार के मतभेद नहीं है। नई दिल्ली में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद ओपीएस ने यह बयान दिया। उपमुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद ओपीएस की प्रधानमंत्री के साथ यह पहली मुलाकात थी। बैठक में राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से ओपीएस ने प्रधानमंत्री को राज्य में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अधिक कोयले की मांग की ओर एक ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर एआईएडीएमके सांसद वी. मैत्रियन भी उपस्थित थे।

संवाददाताओं से बातचीत में पन्नीरसेल्वम ने कहा कि बैठक में किसी प्रकार की राजनीतिक चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि धर्म युद्ध में जीत हासिल करने के बाद ही एआईएडीएमके के दोनों गुटों में विलय हुआ था, जिसके बाद से पलनीस्वामी को काफी समर्थन मिल रहा है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले पलनीस्वामी सभी मंत्रियों के साथ-साथ मुझ से भी राय लेते हैं।


यह पूछने पर कि क्या पार्टी के दरकिनार एआईएडीएमके उपमहासचि टीटीवी दिनकरण को फिर से पार्टी में स्वीकार किया जाएगा, उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए जमीनी स्तर से काम करने वाले ही पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचेंगे। पन्नीरसेल्वम ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को डेंगू के प्रकोप पर नियंत्रण करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई है। जल्द ही प्रधानमंत्री समीक्षा के लिए राज्य मेंकेंद्रीय टीम को भेजेंगे।

बिना विनय के मोक्ष संभव नहीं

साहुकारपेट स्थित जैन आराधना भवन में विराजित गणिवर्य पदमचंद्र सागर ने आज से उत्तराध्ययन सूत्र वाचन के दौरान कहा भगवान महावीर ने केवलज्ञान की प्राप्ति के पश्चात 30 वर्ष तक देशभर में विचरण किया। अपनी आयुष्य के अंतिम 16 प्रहार में उन्होंने अनमोल देशना दी। 55 पुण्य और 55 पाप के स्मरण बतलाए और पूछे और नहीं भी पूछे गए सभी प्रश्नों का समाधान बताया। सबसे आखिर में 36 अध्याय वाला उत्तराध्ययन सूत्र सुनाया। जिन शासन में 4 ही मूल सूत्र हैं और उत्तराध्ययन सूत्र उनमें से एक है। शासन निर्ग्रन्थ (साधु-साध्वी) और ग्रंथ के सहारे ही चलता है।

पहला विनय अध्ययन अर्थात विनय ही धर्म का मूल है और बिना विनय के मोक्ष संभव नहीं है। विनय से आठ प्रकार के कर्म नष्ट होते हैं। अहंकार का विसर्जन ही विनय का सर्जन है। शिष्य का परम मंगल गुरु कृपा है। दूसरा परीषह अध्ययन अर्थात साधना मार्ग में जो सी बाधाएं दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप की आती है, उनको परीषह कहा जाता है। तीसरा चतुरंगी अध्ययन यानी चार अंग-मनुष्यत्व, जिनवाणी श्रवण, धर्म मे अगाध श्रद्धा और पराक्रम। इनका अंगी मोक्ष है। चौथा असंस्कृत अध्ययन अर्थात जिसमें संस्कार का संचार न हो। आयुष्य टूट जाये तो कभी जुड़ती नहीं और आयुष्य पूरी होने के पहले ही हमें परमात्मा के अनुसार सत्कार्य करना है।

 

 

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