डॉक्टर्स दिवस विशेष: कोरोना को मात देकर काम पर लौटे डॉक्टर निभा रहे कर्तव्य

- कर्तव्य के लिए बनाई परिवार वालों से दूरी

By: PURUSHOTTAM REDDY

Updated: 01 Jul 2020, 02:43 PM IST

 

पुरुषोत्तम रेड्डी @ चेन्नई.

एक तरफ फर्ज और इंसानियत है तो दूसरी तरफ अपनी और अपनों की सुरक्षा की चिंता। वैसे ही एक तरफ लाचार मरीज हैं और दूसरी तरफपरिवार। इस समय फर्ज की पुकार अपनों के दुलार पर भारी पड़ रही है। हम बात कर रहे हैं इस समय लोगों के मसीहा बने इंसानियत के उन कोरोना वारियर्स डॉक्टरों की जो अपने से ऊपर उठकर महीनों से अपने दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं।

यहां तक कि वे खुद कोरोना संक्रमित हो गए लेकिन उसे मात देकर अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही ड्यूटी पर लौट गए। डॉक्टर्स दिवस पर चेन्नई के सरकारी अस्पताल के कोविड-१९ वार्ड के नोडल अधिकारी डा. सैम्युअल (बदला हुआ नाम) ने इस वक्त की अपनी मनोदशा पत्रिका के साथ साझा की-

21 मई को हुए कोरोना संक्रमित
डा. सैम्युअल ने बताया कि कोरोना संक्रमण को लेकर अपनी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर दिन रात मरीजों के बीच में हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा खतरा है तो इन्हीं डॉक्टरों को। उनको १९ मई को बुखार आया और कमजोरी महसूस हुई। 2० मई को अस्पताल पहुंचकर अपना काम किया और उसी दिन सुबह स्वैब सैंपल लिया गया। २१ मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई।

संक्रमित होने की खबर सुनते ही वे हिल गए। खुद से ज्यादा उनको मरीजों की चिंता थी जो अकेले होने के साथ-साथ बीमार थे। उनको बेहद डर लग रहा था कि कहीं उनकी वजह से कोई संक्रमित न हो जाए। उन्होंने कहा डर था लेकिन लोगों की मदद करने की भावना भी प्रबल थी। उनका कहना था अगर आपका इम्यून सिस्टम स्ट्रांग हैं, तो आप कोरोना से बच सकते हैं। धीरे-धीरे उनके मन का डर खत्म हुआ और उनको एहसास हुआ कि आम लोग बहुत डरे हुए हैं।

परिवार को नहीं दी सूचना
डॉक्टर सैम्युअल ने बताया कि संक्रमण और लॉकडाउन के नियम के तहत हम लोग अपने परिवार वालों से मिलने नहीं जा सकते थे। उनकी बेटी कॉलेज में और पत्नी व पूरा परिवार गांव में है। वे सामान्य दिनों की तरह उनसे बात करते थे लेकिन उन्होंने परिवार के किसी सदस्य को भनक भी लगने नहीं दी कि वे कोरोना संक्रमित हैं, यहां तक कि पत्नी को भी नहीं बताया।

अपनी चीजों को खुद ही संभालते थे
उन्होंने बताया कि डर, आशंकाएं, मरीज और उनके परिवार वालों की चिंता, थकान अपनी जगह हैं लेकिन काम तो करना ही है। यह मौका आया है जब पूरे देश पर संकट आया है तो इसमें दुखी या निराश होकर नहीं बल्कि पूरे उत्साह और जज्बे के साथ काम कर रहे हैं। परिवार वाले डर न जाएं इसलिए उन्होंने बीमारी के दौरान किसी की मदद नहीं ली। वे अपनी चीजों को खुद ही संभालते थे।

एक जून को काम पर लौटे
नई गाइडलाइन के मुताबिक दूसरी रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही डिस्चार्ज कर दिया जाता है। १२ दिनों तक कोरोना से जंग लडक़र जीतने के बाद उन्होंने दुबारा अपना टेस्ट कराया। एक जून को कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने पर छुट्टी मिल गई। आइसोलेशन से छुट्टी मिलते ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली। डा. सैम्युअल का कहना था कि इस क्षेत्र में आने से पहले ही पता होता है कि चुनौतियां तो आएंगी ही। कोरोना वायरस के दौर में यह चुनौतियां बढ़ गई थी। मैं काम करते समय सबकुछ भूल जाता हूं।

PURUSHOTTAM REDDY
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