महीने में एक दिन हिन्दी के नाम

महीने में एक दिन हिन्दी के नाम

Arvind Mohan Sharma | Updated: 11 May 2018, 01:34:17 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

  • कार्यशाला में बीस से अधिक पत्रों का द्विभाषीकरण किया गया था

मदुरै. दक्षिण रेलवे के मदुरै मंडल में महीने में एक दिन - हिंदी का दिन योजना शुरू की गयी है। इसके तहत पूरे मंडल में काम काज हिंदी में करने और कराने की कोशिश की जाएगी। इस माह नौ मई को हिंदी दिन घोषित किया गया था। मंडल के पळनि, तिरुनेलवेली, दिण्डुगल , मदुरै, मणप्पारै, मानामदुरै में विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गई। कर्मचारियों के हिंदी ज्ञान को अद्यतन करने के लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम, मार्गदर्शन वर्ग आदि के साथ साथ टेबल प्रशिक्षण दिया गया । कार्यशाला में बीस से अधिक पत्रों का द्विभाषीकरण किया गया था। इस कवायद से मदुरै मंडल में वर्ष में 10,000 से अधिक हिंदी शब्द लिखनेवाले कर्मचारियों की सूची में और 40 कर्मचारी जुड़ जाएंगे। तिरुनेलवेली में तकनीशियन सुश्री कनकवेल मीना ने वर्ग संभाला। उसी प्रकार मदुरै कार्यालय में आर.गणेश ने बुनियादी हिंदी से लेकर मूल लेखन तक सिखाया। राजभाषा अधिकारी ए.श्रीनिवासन ने कार्यशाला में कंप्यूटर और यूनिकोड के बारे में जानकारी दी।

 

 


बागवानी विभाग के अस्थायी कार्मिकों की हड़ताल समाप्त
कोयं बत्तूर. नीलगिरी जिले के बागवानी विभाग के आंदोलनरत अस्थायी कर्मचारियों नेजिला कलक्टर के आश्वासन पर हड़ताल समाप्त कर दी।ऊटी में हुई वार्ता में कलक्टर इनोसेंट दिव्या ने कहा कि 18 मई से लॉवर शो शुरु होने वाला है। इससे पहले ही कोई हल निकाला जाएगा। कलक्टर द्वारा तय किए गए मूल वेतन का भुगतान दो दिन में कर दिया जाएगा। उनकी मांगों शिकायतों को मु यमंत्री को बताया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।ऊटी में बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक कार्यालय के सामने पिछले छह दिनों से 8 00 से अधिक अस्थायी कर्मचारी विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि वे 20 साल से काम कर रहे हैं। पर उन्हें स्थायी नहीं किया जा रहा। पीएफ और अन्य भत्ते नहीं दिए जाते जबकि नीलगिरी का बागवानी विभाग इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें प्रति दिन केवल 250 रुपये का भुगतान किया जा रहा हैं। हड़ताली कर्मचारियों में शामिल महिलाओं ने बताया कि उनकी स्थिति दोयम दर्जे की हो गई है। जिले में पांच पार्क व नौ फार्म हैं। प्रशासन को पता है कि इन सभी में काम काज पूरी तरह उन्हीं के भरोसे हैं। २० सालों की सेवा के बाद भी उन्हें स्थायी नहीं किया जा रहा है। वे हर साल अपनी मांग को लेकर यहां आते हैं ,पर विभागीय अधिकारी उन्हें आश्वासन दे कर लौटा देते हैं।

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