दक्षिण भारत अंगदान के मामले में जागरुक, लगातार छठे साल तमिलनाडु को राष्ट्रीय अवॉर्ड

दक्षिण भारत अंगदान के मामले में जागरुक
-लगातार छठे साल तमिलनाडु को राष्ट्रीय अवॉर्ड
- भारत में हर दस लाख में सिर्फ 0.08 डोनर ही अपना अंगदान करते हैं

By: Ashok Rajpurohit

Published: 28 Nov 2020, 05:34 PM IST

चेन्नई. भारत में बड़ी संख्या में मरीज अंग प्रतिरोपण के लिए इंतजार करते-करते दम तोड़ देते हैं। भारत में उत्तरी और पूर्वोत्तर राज्यों में स्थिति बहुत खराब है जबकि दक्षिण भारत अंगदान के मामले में जागरूक प्रतीत होता है। खासतौर पर तमिलनाडु जहाँ प्रति दस लाख लोगों पर अंगदान करने वालों की संख्या 136 है।
स्वास्थ्य मंत्री सी. विजय भास्कर ने पुदुकोट्टे में वर्चुअल अवार्ड समारोह में कहा कि राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अंगदान में लगातार छठे साल राष्ट्रीय अवार्ड जीता है। इस महामारी के बीच मुझे यह अवार्ड लेते हुए गर्व का अनुभव हो रहा है। हमारे सिस्टम एवं चिकित्सकों का योगदान अहम है। हमने कोविड-19 की जांच प्रबंधन करने में सफलता पाई। हमनेअंगदान के मामले में भी अच्छा काम किया है।

लॉकडाउन के दौरान डोनेशन में कमी आई
मंत्री नेकहा कि विभाग ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्र एवं मुख्यमंत्री एडपाडी के. पलनीस्वामी को पत्र लिखकर अंगदाताओं के परिवार के सदस्यों को नौकरियों में आरक्षण के लिए कहा है। फरवरी से अब तक राज्य ट्रांसप्लान्ट अथॉरिटी ने 27 ब्रेन डेड मरीजों से 97 अंग प्राप्त किए। अन्य राज्यों के मुकाबले तमिलनाडु ने पांच डोनेशन अधिक किए। लॉकडाउन के दौरान डोनेशन में कमी आई। ट्रांसटन सदस्य सचिव डॉ. आर. कांतिमती ने कहा, अंगदान ट्रांसप्लान्ट रजिस्ट्री 2008 में स्थापित की गई। वर्ष 2016 में 185, वर्ष 2017 में 160, वर्ष 2018 में 140 तथा वर्ष 2019 में 127 अंगदान किए गए। करीब 90 फीसदी अंगदान सड़क दुर्घटना प्रभावितों से प्राप्त होते है। इस साल दुर्घटनाओं में कमी आई है। महामारी के दौरान चिकित्सकों ने श्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। मरीज के पास जब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता तो ट्रांसप्लान्ट की सलाह दी जाती है।

भारत में ही हर साल लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे
स्वास्थ्य सचिव जे. राधाकृष्णन ने कहा कि कोविड के समय मरीजों के फेंफड़े खराब हो गए थे जिस पर छह चिकित्सकों ने छह मरीजों को प्रत्यारोपण किया। अन्य राज्यों से मरीजों को वायुमार्ग से चेन्नई लाया गया। राजीव गांधी गवर्नमेन्ट जनरल अस्पताल एवं क्रिस्चियन मेडिकल कालेज वेलूर को डोनेशन के लिए श्रेष्ठ अस्पताल अवार्ड दिया गया। इस श्रेणी में कोवै मेडिकल सेन्टर वेस्ट में तथा वेल्लाम्मल मेडिकल कालेज एवं अस्पताल साउथ में रहे। लीवर प्रत्यारोपण के सबसे अधिक मामलों में स्टेनली मेडिकल कालेज अस्पताल एवं रेलाज इन्स्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस ने जीता। एमजीएम हैल्थकेयर ने ह्रदय व फेंफड़े तथा अपोलो अस्पताल में रेन्टल ट्रांसप्लान्ट में अव्वल रहे। भारत में ही हर साल लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अंग दान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अंग दाता अंग ग्राही को अंगदान करता है। दाता जीवित या मृत हो सकता है। दान किए जा सकने वाले अंग गुर्दे, फेफड़े, दिल, आंख, यकृत, पैनक्रिया, कॉर्निया, छोटी आंत, त्वचा के ऊतक, हड्डी के ऊतक, हृदय वाल्व और नस हैं। अंगदान जीवन के लिए अमूल्य उपहार है। अंगदान उन व्यक्तियों को किया जाता है, जिनकी बीमारियाँ अंतिम अवस्था में होती हैं तथा जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है।

भारत में सरकारी स्तर पर उपेक्षा
किसी भी समय किसी व्यक्ति के मुख्य क्रियाशील अंग के खराब हो जाने की वजह से प्रतिवर्ष कम से कम लगभग पांच लाख व्यक्तियों की मृत्यु अंगों की अनुपलब्धता के कारण हो जाती है, जिनमें से दो लाख व्यक्ति लीवर (यकृत) की बीमारी और पचास हजार व्यक्ति हृदय की बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। लगभग एक लाख पचास हजार व्यक्ति गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हैं, जिनमें से केवल पांच हजार व्यक्तियों को ही गुर्दा प्रत्यारोपण का लाभ प्राप्त होता है। भारत में हर दस लाख में सिर्फ 0.08 डोनर ही अपना अंगदान करते हैं। अमेरिका, यूके, जर्मनी में 10 लाख में 30 डोनर और सिंगापुर, स्पेन में हर 10 लाख में 40 डोनर अंगदान करते हैं। इस मामले में भारत काफी पीछे है। जानकारों का कहना है कि भारत में सरकारी स्तर पर उपेक्षा इसकी बड़ी वजह है।
............................

Ashok Rajpurohit
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned