पादरी को तीस साल के कारावास की सजा, दो दोषियों को चार बार की उम्रकैद

2 किशोरियों को जिस्मफरोशी में धकेलने का मामला

By: P S Kumar

Updated: 07 Jan 2019, 10:15 PM IST

कडलूर. दो किशोरियों के अपहरण, यौन उत्पीडऩ और जबरन वेश्यावृत्ति में धकेलने के मामले में दोषी ठहराए गए पादरी अरुलदास को कडलूर महिला कोर्ट ने तीस साल के कारावास और ५ लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अन्य पंद्रह आरोपियों को चार से दो बार तक के आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। १६ अभियुक्तों को ४ जनवरी को ही दोषी ठहरा दिया गया था।

मामले के अनुसार २०१४ में दो स्कूल छात्राओं का अपहरण कर उनका यौन उत्पीडऩ हुआ था। सीबी-सीआईडी ने २०१६ में इस मामले की जांच पूरी कर पादरी समेत २३ जनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोपितों में से २ जनों की मृत्यु हो गई जबकि सतीश कुमार और तमिलकती नाम के आरोपी भगौड़े है। सीबी-सीआईडी ने १७ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। महालक्ष्मी नाम की आरोपित को कोर्ट ने बरी कर दिया।

महिला कोर्ट ने स्कूली छात्राओं के यौन शोषण के इस मामले को शर्मनाक बताते हुए सजा सुनाई। सजा के तहत कला, धनलक्ष्मी, श्रीधर, फातिमा, मोहनराज व मदीवानन को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आनंदराज और बालसुब्रमण्यम को चार बार आजीवन कारावास काटना होगा। अन्बझगन को आजीवन कैद और उसकी पत्नी अमुदा को दस साल की जेल हुई है। शेष गिरिजा, शर्मीला बेगम, राजलक्ष्मी और राधिका को दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

कोर्ट ने पादरी अरुलदास को तीस साल और पांच लाख के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अगर वे जुर्माना नहीं भरते हैं तो पांच साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। सभी दोषियों को कडलूर केंद्रीय जेल में डाल दिया गया है।

P S Kumar Editorial Incharge
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