पहले साइकिल-साडिय़ों पर भी मिलता था ऋण...

- लॉकडाउन में बैंकें खुली रहने से पॉन ब्रोकर पर पड़ा सीधा असर
- पॉन ब्रोकर की बजाय बैंकों से अधिक लिया ऋण
- अकेले चेन्नई महानगर में छह हजार से अधिक पॉन ब्रोकर की दुकानें

By: Ashok Rajpurohit

Updated: 07 Jul 2020, 09:20 PM IST

चेन्नई. कोरोना वायरस के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित दैनिक कामकाजी, दिहाङी मजदूर व अत्यंत गरीब लोग हुए। हालात ऐसे थे कि इनमें से कई दो वक्त की रोटी के लिए तरस गए है। तो कई पर कर्ज चढ चुका है। चूंकि इनके पास किसी तरह की जमापूंजी नहीं थी और यदि किसी के पास थोङी बहुत धनराशि थी भी तो वह सब लॉकडाउन की अवधि में पूरी हो गई। ऐसे हालात में लॉकडाउन खुलने पर उनके सामने ऋण लेने के अलावा विकल्प नहीं था लेकिन लॉकडाउन की अवधि में बैंकें खुली रहने के चलते लोगों ने बंैंकों के जरिए ही ऋण लिया।
ऋण देने की प्रक्रिया अधिक आसान
हालांकि पॉन ब्रोकरों का कहना है कि उनकी ऋण देने की प्रक्रिया अधिक सहज, सरल व आसान है। लेकिन ला$कडाउन के दौरान बैंकें खुली होने तथा पान ब्राकर दुकानें बन्द होने से लोगों ने बैंकों से ऋण ले लिए। ऐसे में पॉन ब्रोकर को सीधा इसका नुकसान भी उठाना पङा। जबकि लाकडाउन के दौरान भी दुकान का किराया, बिजली का बिल एवं अन्य खर्चे तो चालू ही थे।
97 फीसदी पॉन ब्रोकर राजस्थान मूल के
अकेले चेन्नई महानगर में कोई छह हजार से अधिक पॉन ब्रोकर की दुकानें है जिनके पास पॉन ब्रोकर का वैद्य लाइसेंस है। इनमें से करीब 97 फीसदी पॉन ब्रोकर राजस्थान मूल के है।
पॉन ब्रोकर का तमिलनाडु का सबसे बड़ा एसोसिएशन, तमिलनाडु पॉन ब्रोकर एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन है। एसोसिएशन की ओर से पिछले दिनों सदस्यता अभियान चलाया गया था जिसमें अकेले चेन्नई महानगर से करीब पांच हजार पॉन ब्रोकर इस एसोसिएशन की सदस्यता ग्रहण कर चुके है। सदस्यता अभियान चालू है और आने वाले दिनों में अन्य पॉन ब्रोकर को एसोसिएशन से जोङे जाने की योजना है।
सोने-चांदी पर ऋण
इन दिनों कोरोना महामारी से समूचा विश्व जूझ रहा है। तमिलनाडु में भी महामारी पांव पसार चुकी है। पॉन ब्रोकर के व्यापार से जुड़े लोगों की मानें तो गरीब व मजदूर वर्ग भयंकर तंगी झेल रहा है। वह किसी तरह अब भी लोगों से अधिक ब्याज पर पैसे लेकर खर्च चला रहा है। पॉन ब्रोकर अभी सोने व चांदी के गहने गिरवी रखने के बदले ऋण मुहैया करवाते है। कहीं-कहीं पीतल के बर्तनों पर भी ऋण दिया जाता है। हालांकि आज से तीन- चार दशक पहले तक साइकिल, साङी व कुछ अन्य चीजें गिरवी रखने पर भी ऋण उपलब्ध करवाया जाता था।
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निम्न वर्ग अधिक ऋण लेते हैं पॉन ब्रोकरों से
तमिलनाडु पॉन ब्रोकर एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन ने लाकडाउन के दौरान सरकार से मांग की थी कि पॉन ब्रोकर की दुकानें भी रोज एक घंटे के लिए खोलने की अनुमति दी जाएं। ताकि जिस तरह बैंक खुले हुए है उसी तरह पॉन ब्रोकर की दुकानें कुछ समय खुलने से जरूरत मन्द लोगों को ऋण उपलब्ध करवाया जा सकें। लेकिन तब सरकार ने अनुमति नहीं दी थी। पॉन ब्रोकर से ऋण लेने वालों में अधिकांश निम्न व गरीब वर्ग के लोग है। लॉकडाउन के कारण यह वर्ग ही सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
- स्वामी तेजानन्द महाराज, प्रदेशाध्यक्ष, तमिलनाडु पॉन ब्रोकर एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन।
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Ashok Rajpurohit
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