फीकी पड़ी इत्र की खुशबू , इत्र का निर्यात एशिया और यूरोप के करीब 50 देशों में होता है

फीकी पड़ी इत्र की खुशबू
- इत्र का निर्यात एशिया और यूरोप के करीब 50 देशों में होता है
- विदेश से डिमांड में कमी आने और निर्यात प्रभावित होने से बड़ा नुकसान
- चंदन तेल महंगा, बंदी की कगार पर इत्र कारखाने

By: ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Published: 01 Aug 2021, 11:39 PM IST

चेन्नई. तमिलनाडु एवं कर्नाटक में चंदन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर इत्र कारोबार पर पड़ा है। कई देशों में लगे लॉकडाउन की वजह से भी डिमांड में कमी आई। इसका सीधा असर कारखानों में उत्पादन पर पड़ा। कारोबार से जुड़े जानकारों का मानना है कि पिछले लॉकडाउन के दौरान कारोबार प्रभावित हुआ था। मांग में कमी और कम उत्पादन की वजह से कई कारखानों में कारीगरों की संख्या भी कम कर दी गई थी। इससे करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ।
अब लगातार दूसरे साल कोरोना की वजह से इत्र के उत्पादन से लेकर सप्लाई तक असर पड़ा है। लगातार बाजार बंद होने से मांग में बेहद कमी है। इससे कारोबारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही विदेशों से आने वाले चंदन तेल के दाम भी बढ़े हुए हैं। इससे महंगा तेल खरीदकर इत्र बनाना व्यापारियों के बस की बात नहीं है। ऐसे में ज्यादातर व्यापारियों ने खरीद बंद कर दी। इससे कारखाने बंदी की कगार पर पहुंच गए।
आस्ट्रेलिया, अफ्रीका से भी मंगवाते हैं चंदन तेल
व्यापारी आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और कंजानिया से भी चंदन तेल मंगाते हैं। सदियों पुराना इत्र कारोबार कोरोना काल में मुश्किल दौर से गुजरा। पिछले साल लगे झटके से उबरे बिना इस साल फिर से कोरोना के बढ़ते दायरे ने इस कारोबार को सिमटा दिया। विदेश से डिमांड में कमी आने और निर्यात प्रभावित होने से बड़ा नुकसान हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि जल्द विकल्प न मिला तो पुश्तैनी इत्र कारोबार चौपट हो जाएगा। कारखाने बंद हो जाएंगे। अनलॉक के दौरान देश के अंदरूनी हिस्सों में तो किसी तरह इत्र भेज दिया गया लेकिन विदेश जाने वाली सप्लाई प्रभावित हो गई।
अगरबत्ती-धूपबत्ती में भी चंदन तेल
इत्र के साथ ही अगरबत्ती और धूपबत्ती में भी चंदन तेल का इस्तेमाल होता है। इत्र का कई यूनानी दवाओं में भी इस्तमाल किया जाता है। कई बड़ी कम्पनियां अपनी दवाओं के लिए जड़ी-बूटीयों का तेल और खुशबू तैयार करवाकर मंगवाती हैं। अगर व्यापारियों को विकल्प मिल जाता है तो इससे उत्पाद सस्ते होंगे। कारोबार भी तरक्की करेगा। चंदन तेल का विकल्प तैयार करने के लिए करीब 20 साल से वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। कई जंगली लकड़ियों, तिल, गरी तेल पर शोध हुआ है।
पचास से अधिक देशों में निर्यात
इत्र का निर्यात एशिया और यूरोप के करीब 50 देशों में होता है। अमरीका, डेनमार्क, बुल्गारिया, फिनलैंड, सऊदी अरब, ओमान, इराक, ईरान, जर्मनी समेत कई देशों में प्रोडक्ट भेजे जाते है। पिछले साल भी लगे लॉकडाउन के दौरान इत्र बनाने के काम पर असर पड़ा था। अनलॉक में काम शुरू हुआ तो सप्लाई भेजने में परेशानी हुई। रमजान और ईद के मौके पर अरब देशों सहित दुनिया के कई देशों में इत्र की सप्लाई नहीं हो पाई। कोरोना के संक्रमण और लॉकडाउन सहित कई पाबंदी की वजह से एक्सपोर्ट में आ रही अड़चनों से दूसरे देशों में इत्र नहीं जा पाया। कई जगह बाजार बंद होने से डिमांड भी नहीं आई। इससे इत्र कारोबारियों को तगड़ा झटका लगा।

ASHOK SINGH RAJPUROHIT
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned