विवादास्पद राफेल सौदे पर देशभर में कांग्रेस करेगी प्रदर्शन

विवादास्पद राफेल सौदे पर देशभर में कांग्रेस करेगी प्रदर्शन

Ashok Singh Rajpurohit | Publish: Sep, 03 2018 09:44:22 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

पायलट ने केन्द्र सरकार पर जमकर साधा निशाना

चेन्नई. विवादास्पद राफेल सौदे पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने केन्द्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। चेन्नई में हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा फ्रांस के साथ 36 लड़ाकू विमानों के सौदे के इस कथित घोटाले को लेकर केन्द्र सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। यह सौदा विमान खरीदी के तय प्रावधानों को नजरंदाज करते हुए किया गया। सौदे से पहले रक्षा मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय तक को भरोसे में नहीं लिया गया।
पायलट ने कहा तत्कालीन संप्रग सरकार के शासन के समय वर्ष 2012 में किए गए अनुबंध के मुताबिक एक राफेल विमान का खरीद मूल्य 560 करोड़ रुपए तय किया गया। मोदी की राजग सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस अनुबंध को रद्द कर दिया। वर्ष 2016 में नए अनुबंध के तहत एक राफेल विमान की कीमत 16७0 करोड़ रुपए तय की गई।

उन्होंने सवाल किया कि आखिर मोदी सरकार ने वर्ष 2012 के मुकाबले लगभग तीन गुणा मूल्य पर इन विमानों का सौदा किस आधार पर किया। राफेल सौदा मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जानी चाहिए।
2012 में कांग्रेस सरकार ने फ्रांस से जो डील की थी उसमें तय हुआ कि 126 राफेल खरीदेंगे। इसमें एक की कीमत 560 करोड़ रुपए तय की गई। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 36 राफेल सीधे तौर पर खरीदने का फैसला किया। ऐसे में 560 करोड़ के हिसाब से 36 राफेल के दाम लगभग 18 हजार करोड़ रुपए होते हैं लेकिन नई डील 60 हजार करोड़ रुपए की है।

उन्होंने कहा कि इसका ठेका भी अनिल अंबानी की कंपनी को देने का निर्णय लिया है जिसे लड़ाकू विमान खरीदने का कोई अनुभव नहीं है। नरेन्द्र मोदी ने सीधे अनिल अंबानी को फायदा पहुंंचाने के लिए यह करार किया है। मोदी सरकार इस पूरे मामले में भारत एवं फ्रांस सरकार के बीच गोपनीय समझौते की बात कहकर बचने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशभर में केन्द्र सरकार समेत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने का निर्णय लिया है। केन्द्र सरकार के करोड़ों रुपए के इस घोटाले में जनता को अवगत कराने के लिए लगातार आन्दोलन चलाने का ऐलान किया है।
पायलट ने कहा कि मोदी सरकार ने बेरोजगारों को नौकरियां देने का वादा किया था लेकिन वह अपने वादे पर खरी नहीं उतर सकी। किसान लगातार आत्महत्या करने को मजबूर हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल की मार से आमजन परेशान है।

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