पीएम मोदी ने तमिलनाडु में राष्ट्र को समर्पित की कई परियोजनाएं, तेल व गैस की कई परियोजनओं की नीव रखीं

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार मध्यम वर्ग की कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील है और भारत अब किसानों और उपभोक्ताओं की मदद करने के लिए इथेनॉल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

By: PURUSHOTTAM REDDY

Published: 17 Feb 2021, 09:03 PM IST

चेन्नई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु में तेल व गैस क्षेत्र की कई परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इसके अंतर्गत पीएम मोदी ने रामनाथपुरम-तुतुकुड़ी प्राकृतिक गैस परियोजना और मनली स्थित चेन्नई पेट्रोलियम निगम लिमिटेड के गैसोलाइन विगंधकन (प्रदूषण को कम करने के लिए जीवाश्म ईंधनों को गंधक मुक्त करना) ईकाई को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके बाद पीएम मोदी ने नागपट्टिनम में कावेरी बेसिन रिफाइनरी की आधारशिला भी रखी।

तमिलनाडु में एण्णूर-तिरुवल्लूर-बेंगलुरु-पुदुचेरी-नागापट्टिनम-मदुरै-तुत्तुकुडी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के रामनाथपुरम- तुत्तकुडी खंड का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, ''क्या हमें आयात पर इतना निर्भर होना चाहिए? मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता लेकिन यह जरूर कहना चाहता हूं कि यदि हमने इस विषय पर ध्यान दिया होता, तो हमारे मध्यम वर्ग को बोझ नहीं उठाना पड़ता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से दक्षिण भारत में कई क्षेत्रों को फायदा होगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'इंडियन ऑयल की 143 किमी लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन रामनाथपुरम से तुत्तुकुडी तक लॉन्च की जा रही है, जो आज ओएनजीसी के गैस क्षेत्रों से गैस का विमुद्रीकरण करेगी। यह 4,500 करोड़ रुपए की लागत से विकसित होने वाली एक बड़ी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना का हिस्सा है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले छह सालों में तमिलनाडु में कार्यान्वयन के लिए 50,000 करोड़ रुपए से अधिक की तेल और गैस परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं, इस अवधि में, 2014 से पहले स्वीकृत 9,100 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं पूरी हो गईं। इसके अलावा, 4,300 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।

उन्होंने कहा, ''स्वच्छ और हरित ऊर्जा के स्रोतों की दिशा में काम करना और ऊर्जा-निर्भरता को कम करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है। देश में पेट्रोल की कीमत आज पहली बार 100 रुपए के पार चली गई। राजस्थान में पेट्रोल की कीमत ने शतक पूरा कर लिया जबकि मध्यप्रदेश में यह सैकड़ा लगाने के बेहद करीब पहुंच गयी। ज्ञात हो कि देश में ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों पर निर्भर रहती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार मध्यम वर्ग की कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील है और भारत अब किसानों और उपभोक्ताओं की मदद करने के लिए इथेनॉल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि गन्ने से निकाले जाना वाला इथेनॉल आयात को कम करने में मदद करेगा और किसानों को आय का एक विकल्प भी देगा। पीएम ने कहा कि सरकार ऊर्जा के अक्षय स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और 2030 तक देश में 40 प्रतिशत ऊर्जा का उत्पादन होगा। उन्होंने कहा, ''लगभग 6.52 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया गया है। यह संख्या और भी बढऩे की उम्मीद है। हमारी कंपनियों ने गुणवत्ता वाले तेल और गैस परिसंपत्तियों के अधिग्रहण में विदेशों में निवेश किया है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच वर्षों में तेल और गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में 7.5 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है और 470 जिलों को कवर करते हुए शहर के गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार वर्तमान ऊर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की दिशा में काम कर रही है। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जुड़ते हुए प्रधानमंत्री ने मनली स्थित चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की सल्फर रहित (डिसल्फाराइजनेशन) गैसोलीन इकाई भी राष्ट्र को समर्पित की और नागपट्टिनम में कावेरी बेसिन तेलशोधक केन्द्र की आधारशिला भी रखी।

रामनाथपुरम-तुत्तुुकुडी खंड 143 किलोमीटर लंबा होगा। इस पर करीब 700 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस परियोजना से तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) के गैस क्षेत्रों से गैस का उपयोग करने तथा प्राकृतिक गैस को उद्योगों और अन्य व्यापारिक उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

सल्फर रहित गैसोलीन इकाई के निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपए की लागत आई है। यह 8 पीपीएम वाली इकाई है और इसे पर्यावरण के अनुकूल गैसोलीन से कम सल्फर का उत्पादन करने वाला बनाया गया है। साथ ही यह उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करेगा और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी एक योगदान होगा।

नागापट्टिनम में स्थापित की जाने वाली कावेरी बेसिन रिफाइनरी की क्षमता 90 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी। इसे इंडियन ऑयल कॉपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) के संयुक्त उद्यम के माध्यम से 31,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्थापित किया जाएगा।

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