scriptPocso Act cases rose in chennai | चेन्नई में हर रोज एक बच्ची यौन शोषण का शिकार, एक साल में 435 पॉक्सो एक्ट के मामले | Patrika News

चेन्नई में हर रोज एक बच्ची यौन शोषण का शिकार, एक साल में 435 पॉक्सो एक्ट के मामले

ग्रेटर चेन्नई पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनसार वर्ष 2020 से 2021 की तुलना में पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस) एक्ट के मामले दोगुने हो गए है।

चेन्नई

Published: May 17, 2022 03:45:42 pm

पुरुषोत्तम रेड्डी@ चेन्नई

चेन्नई में पिछले दिनों चार लडक़ों ने अपनी सहपाठी के साथ यौन शोषण करने की कोशिश की जिसके बाद इनपर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हर कोई उस बच्ची के साथ हुए घटना को जानकार हैरान है और यौन अपराध के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ आज देश की हर एक मां के जहन में बस एक ही सवाल है कि कहीं उसकी बच्ची भी इस तरह की दरिंदगी का शिकार न हो जाए। इस खास रिपोर्ट में चेन्नई में बच्चों से जुड़े अपराध के आंकड़ों से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो कि वाकई में चौंकाने वाले हैं।

Pocso Act cases rose in chennai
Pocso Act cases rose in chennai

दोगुने हो गए पॉक्सो एक्ट के मामले
ग्रेटर चेन्नई पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनसार वर्ष 2020 से 2021 की तुलना में पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस) एक्ट के मामले दोगुने हो गए है। यहीं नहीं चेन्नई में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ सभी अपराध, जैसे बलात्कार, छेड़छाड़, अपहरण, दहेज हत्या, बच्चों के प्रति यौन उत्पीडऩ शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराध के मामलों में वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में पॉक्सो के मामले 239 थे जो 2021 में बढकऱ 435 हो गए और इस साल फरवरी तक 49 मामले दर्ज हो चुके है।

हर रोज एक मामला
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस साल फरवरी महीने तक आंकड़ों के अनुसार उन्हें चेन्नई के ऑल वुमेन पुलिस थानों में हर दिन कम से कम पॉक्सो एक्ट से जुडी एक शिकायत प्राप्त हुई है। लॉकडाउन प्रतिबंधों को हटाने के बाद गतिविधियों शुरू हुई और मामले में बढ़ोत्तरी शुरू हो गई। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि बढ़ते मामलों की प्रवृत्ति एक अच्छा संकेत है क्योंकि महिलाएं और बच्चे रिपोर्ट करने के लिए आगे आ रही हैं। महिला संबंधी अपराध, छेडख़ानी, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और अन्य अपराध जैसे मामले भी ज्यादा दर्ज किए गए हैं।

महिला संबंधी अपराध भी सबसे ज्यादा बढ़े
केंद्र और राज्य सरकारों के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम करने वाली चेन्नई पुलिस के तहत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध विंग की सहायक आयुक्त श्यामला देवी का कहना है कि जब लॉकडाउन प्रतिबंधों में छूट दी गई तो बच्चे अपने खिलाफ हुए अपराध की रिपॉटिंग करने लगे। लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में ही रहे हैं लेकिन अपराध बढ़े हैं। प्रतिबंधों में छूट के बाइ इस तरह के मामले अधिक आने लगे। महिला व नाबालिगों के प्रति अपराधों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। कोरोना की शुरुआत में मार्च 2020 के आखिर में जब लॉकडाउन लगा तो अपराध कम थे।
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आंकड़ों पर एक नजर-
अपराध 2020 2021 2022*
बलात्कार 31 45 2
छेडछाड 61 146 16
अपहरण 14 26 0
दहेज हत्या 3 1 0
यौन शोषण 7 10 0
दहेज मामले 9 16 5
पॉक्सो एक्ट 239 435 49
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-* नोट: वर्ष 2022 के सभी मामले फरवरी तक के है।

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