Tamilnadu: ना तूं खुश हैं, ना मैं खुश हूं, अगर खुश हैं तो यह दिल हैं...

हास्य व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर (Ashok Chakradhar) को अनुभूति सम्मान (Anubhuti Award) -2019 से नवाजा, चक्रधर ने कविताओं के जरिए श्रोताओं हंसा-हंसा कर किया लोटपोट

चेन्नई. तुम भी जल थे, हम भी जल थे, इतने घुले-मिले थे कि एक-दूसरे से जलते न थे। न तुम खल थे न हम खल थे, इतने खुले-खुले थे कि एक-दूसरे को खलते न थे। अचानक हम तुम्हें खलने लगे, तो तुम हमसे जलने लगे, तुम जल से भाप हो गए, और तुम से आप हो गए। और तुझे भ्रम हैं मैं तेरा हूं, मुझे भ्रम हैं तूं मेरी हैं, ना तूं मेरी हैं ना मैं तेरा हूं, अगर कुछ हैं तो इगो हैं। तुझे भ्रम हैं कि मैं खुश हूं, मुझे भ्रम हैं कि तूं खुश हैं। ना तूं खुश हैं, ना मैं खुश हूं, अगर खुश हैं तो यह दिल हैं। समेत अन्य कविताओं के माध्यम से मशहूर कवि एवं व्यंग्यकार अशोक चक्रधर ने समां बांध दिया। अवसर था अनुभूति की ओर से आयोजित अनुभूति सम्मान-2019 का। देश के सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर को अनुभूति सम्मान-2019 से नवाजा गया। महानगर के चेटपेट हैरिंगटन रोड स्थित चिन्मया हैरिटेज सेन्टर में आयोजित सम्मान समारोह में चक्रधर ने अपनी कविताएं सुनाकर श्रोताओं को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। पदमश्री से सम्मानित इस कलाकार ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से कविताओं की बेहतरीन प्रस्तुति दी।
चक्रधर ने लिखे हैं पानीपत के संवाद
फिल्म पानीपत 6 दिसम्बर को रिलीज होने वाली है। आशुतोष गोवरीकर के निर्देशन में बन रही इस फिल्म पानीपत में हिंदी साहित्य व हास्य व्यंग्यकार अशोक चक्रधर का नाम भी जुड़ गया है। इस फिल्म के संवाद मशहूर कवि अशोक चक्रधर ने लिखे हैं।
खुद चक्रधर ने यहां कार्यक्रम में इस बात की जानकारी साझा की। हिंदी हास्य व्यंग्य में अहम योगदान देने वाले चक्रधर संजय दत्त, अर्जुन कपूर, कृति सेनन की फिल्म पानीपत के लिए डॉयलाग लिखे हैं। पानीपत नामक फिल्म इतिहास के पन्नों से जुड़ी है। पानीपत की तीसरी लड़ाई पर आधारित फिल्म पानीपत में मराठा साम्राज्य और अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली के बीच की लड़ाई को दिखाया जाएगा।
चौं रे चंपू ने खूब हंसाया
इस मौके पर उन्होंने चौं रे चंपू सीरिज को सुनाया जिसमें चाचा व चंपू सामा्िजक-राजनीतिक मुद्दों पर मजेदार शैली में बात करते हैं। मेट्रो रेल मथुरा की उद्घोषणा को उन्होंने रोचक अंदाज में सुनाकर लोगों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया।
अपना रास्ता खुद बनाती हैं भाषाएं
चक्रधर ने कहा कि भाषाएं अपना रास्ता खुद बनाती है। भाषाएं आत्मीयता के लिए होती है, वैर बढ़ाने के लिए नहीं होती। हम तमिल से भी उतना ही प्यार करते हैं जितना हिंदी से। भाषा संवाद का एक जरिया है।
चेन्नई से रहा है खास लगाव
अनुभूति के महासचिव गोविन्द मूंदड़ा ने अशोक चक्रधर से उनके निजी जीवन से लेकर कविता की यात्रा समेत तमाम तरह के सवाल पूछे जिनका चक्रधर ने बेबाकी से जवाब दिया। सवाल-जवाब के दौरान ही चक्रधर ने बताया कि वे सबसे पहले चेन्नई 4 फरवरी 1978 को आए थे। उसके बाद से चेन्नई से उनका आत्मीय नाता बन चुका है। अनुभूति के अध्यक्ष रमेश गुप्त नीरद ने स्वागत भाषण दिया। चक्रधर एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह की शुरुआत की।
सहयोगियों का किया सम्मान
समारोह में कार्यक्रम के प्रमुख सहयोगी जीएम मोड्यूलर के किरण जैन समेत अन्य सहयोगियों गौतम जैन, आशीष जैन, बृज खंडेलवाल, पुष्पा मूंदड़ा, ग्वालदास करनानी, एस.एस. मालपानी, विजय गोयल, अरुण बोहरा व चेतन जैन का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान अनुभूति की एक झलक भी दिखाई गई। वर्ष 2016 में गोपालदास नीरज, वर्ष 2017 में बालकवि बैरागी तथा वर्ष 2018 में माया गोविन्द को अनुभूति सम्मान से नवाजा जा चुका है।

Ashok Rajpurohit
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