राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने की है जिम्मेदारी

राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने की है जिम्मेदारी

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Apr, 16 2019 12:58:18 AM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

दक्षिण चेन्नई लोकसभा सीट राज्य में तीन निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। पहले इसे मद्रास साउथ के नाम से जाना जाता था। यह सीट 1957 में मद्रास लोकसभा...

चेन्नई।दक्षिण चेन्नई लोकसभा सीट राज्य में तीन निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। पहले इसे मद्रास साउथ के नाम से जाना जाता था। यह सीट 1957 में मद्रास लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के विभाजन के माध्यम से बनाया गई थी। इस निर्वाचन क्षेत्र में 6 विधानसभा क्षेत्र शामिल थे। राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री सी. एन. अण्णादुरै ने 1967 में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित होने के बाद अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसे बाद में मुरासोली मारन ने यहां से चुनाव लड़ा और जीता। वर्तमान में यह सीट अन्नाद्रमुक के डॉ. जे. जयवर्धन के पास है।

इस लोकसभा चुनाव में साउथ चेन्नई निर्वाचन क्षेत्र में आमने सामने खड़े एआईएडीएमके और डीएमके के उम्मीदवारों पर अपनी-अपनी राजनीतिक विरासत को संभाले रखने की जिम्मेदारी है। राजनीति में वंशवाद को लेकर हो रही बहस से ये दोनों ही उम्मीदवार अप्रभावित हैं। साउथ चेन्नई से इस आम चुनाव में एआईएडीएमके ने अपने पूर्व विजेता खिलाड़ी जे. जयवर्धने और डीएमके ने तमिझची तंगपांडियन उर्फ सुमति को मैदान में उतारा है। पेशे से डॉक्टर और राज्य के मत्स्यपालन मंत्री डी. जयकुमार के बेटे ज. जयवर्धने युवा राजनीति की पहचान रखते हैं। उन्होंने 2014 के आम चुनाव में डीएमके के दिग्गज नेता टीकेएस इलंगोवन को भारी मतों के अंतर से हराया था।

2009 के लोकसभा चुनाव में भी इस सीट पर एआईएडीएमके का ही कब्जा रहा। उससे पहले 2004 के चुनाव में डीएमके के टीआर बालू ने 2 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार डीएमके ने 2004 का जादू फिर से चलाने की उम्मीद में सुमति को यहां से टिकट दिया है।

साहित्यकार, थियेटर कलाकार, गीतकार सुमति यानी तमिझची तंगपांडियन के लिए यह राजनीति का आगाज है। उनके लिए राजनीति नई नहीं है। तमिझची के पिता स्वर्गीय वी. तंगपाडियन और भाई तंगम तेन्नरसु डीएमके में मंत्री है। वे खुद 2007 से डीएमके की आर्ट विंग का हिस्सा हैं। 1957 से अब तक 8 बार इस सीट पर डीएमके ने अपना वर्चस्व जमाया है।

हालांकि चुनाव से पहले इन उम्मीदवारों के लिए पारिवारिक पृष्ठभूमि आत्मविश्वास बढ़ाने वाली हो सकती है, लेकिन इससे अन्य राजनीतिक दलों के लिए पारिवारिक राजनीति पर कटाक्ष करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
दक्षिण चेन्नई भी महानगरीय क्षेत्र में आता है। अंग्रेजी और तमिल दो प्रमुख भाषाएं हैं जो यहां बोली जाती हैं।

चेन्नई दक्षिण सीट पर औसत साक्षरता दर 90 प्रतिशत से ऊपर है। कुल 40 उम्मीदवार विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए 27 आवेदन अस्वीकार कर दिए जबकि उनमें से दो ने नामांकन वापस ले लिया।

 

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