इस बार सियासत की रुख तय करेगा सोशल मीडिया

राजनीतिक दल आईटी टीम को कर रहे मजबूत
- वार्ड व बूथ स्तर तक बनाए जा रहे व्हाटसएप ग्रुप
- ले रहे आईटी प्रोफेशनलों की सलाह

By: Ashok Rajpurohit

Published: 07 Sep 2020, 11:20 PM IST

चेन्नई. चाहे बिहार के विधानसभा चुनाव हो या फिर देश के अलग-अलग राज्यों में हो रहे उप चुनाव। कोरोना काल में इस बार चुनाव प्रचार का तरीका बदला हुआ नजर आएगा। जनसभाओं की मनाही के चलते इस बार चुनाव सोशल मीडिया से अटे रहेंंगे। यानी चुनाव प्रचार का तरीका पूरी तरह बदला हुआ दिखेगा। वर्चुअल रैली व फेसबुक लाइव की व्यवस्था की जा रही है। वार्ड एवं बूथ स्तर पर व्हाटस अप ग्रुप बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। कोरोना महामारी के चलते भीड़ इकट्ठी करने की अनुमति नहीं मिल सकेगी। ऐसे में राजनीतिक दलों के पास सोशल मीडिया का सहारा ही बचेगा। इसका वे इन चुनावों में जमकर फायदा उठाएंगे। इसके लिए राजनीतिक दलों ने अपनी आईटी टीम को अभी से मजबूत करना शुरू कर दिया है क्योंकि इस बार बड़ा दारोमदार आईटी टीम के कंधों पर रहना है। ऐसे में चुनाव में इस बार व्हाटसएप, ट्विटर, फेसबुक की धूम रहने वाली है।
हर व्यक्ति के पास इन्टरनेट कनेक्शन नहीं
राजनीतिक दलों में लोगों को सोशल मीडिया से जोडऩे की होड शुरू हो चुकी है। कई राजनीतिक दल यूट्यूब चैनल बना रही है। इसके लिए आईटी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। बडे राजनीतिक दलों ने आईटी प्रोफेशनल्स को इस काम में अभी से लगा दिया है। आज सोशल मीडिया हर व्यक्ति तक पहुंच चुका है। ऐसे में राजनीतिक दलों को अधिक मशक्कत भी नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि सोशल मीडिया व वर्चुअल रैलियों में इन्टरनेट एक बड़ी बाधा बन सकता है। हर व्यक्ति के पास इन्टरनेट कनेक्शन नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति 100 व्यक्तियों में से 54 के पास इन्टरनेट कनेक्शन है। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा और कम है।
नियमों की पालना बड़ी चुनौती
कोरोना काल में संक्रमण के खतरे को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग व निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन की पालना करना राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती होगा। कोरोना के चलते कई दल फिर से पुरानी परिपाटी पर आ सकते हैं। वे डोर-टू-डोर संपर्क साधने की तरफ मुड सकते हैं। हालांकि पिछले एक दशक से चुनाव में सोशल मीडिया प्रवेश कर चुका है लेकिन इस बार दूसरे आप्शन कम होने के कारण सोशल मीडिया का प्रयोग बढऩे की उम्मीद है।
रैली-जुलूस नहीं हो पाएंगे
राजनीतिक दल सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को मान चुके है। इस बार फेसबुक के जरिए लाइव शो भी देखने को मिल सकते हैं। ट्विटर भी इस बार राजनीतिक दलों के लिए अहम होगा। इस बार कोरोना के चलते रैली व जुलूस नहीं होने के साथ हर राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर ही अपनी ताकत दिखाने को बेताब नजर आएगा।
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आगामी चुनाव सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर
आगामी चुनाव सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ही लड़े जाएंगे। इसमें वर्चुअल रैलियां मददगार बन सकती है। राजनीतिक दल अभी से सोशल मीडिया कै पेन पर जोर देने लगे हैं। चुनाव की घोषणा के साथ इसमें तेजी आने की संभावना है। वार्ड, बूथ व मंडल स्तर पर राजनीतिक दलों के वा़ट्सअप ग्रुप बनाए जा रहे हैं और इसमें कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति-नीति के बारे में बताया जा रहा है। आज हर हाथ में फोन है। डेटा भी लगातार सस्ते हो रहे हंै।
पेमाराम सीरवी महाबलीपुरम, पूर्व जिला प्रमुख, पाली

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