महाबलीपुरम PM Modi की लोकप्रियता तो बढ़ी लेकिन कमल का खिलना मुश्किल

महाबलीपुरम में बिछाई थी तमिल संस्कृति से तालमेल की बिसात



By: P S Kumar

Updated: 06 Mar 2021, 12:07 PM IST

Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

पी. एस. विजयराघवन


चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब २०१९ में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महाबलीपुरम दिखाने लाए उस वक्त ही तमिलनाडु में लोकप्रियता की आधारशिला रख दी थी। मोदी की उसके बाद से तमिलनाडु में लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन यक्ष प्रश्न यही है कि क्या यह लोकप्रियता उनके गठबंधन को राज्य विधानसभा में जीत दिला सकेगी।


चेन्नई से साठ किमी की दूरी का सफर भले ही थकाने वाला नहीं था धूप का असर तो दिख रहा था। इस थकावट को बंगाल की खाड़ी की हवाओं ने दूर कर दिया। कोरोना का असर इस पर्यटन स्थल पर साफ नजर आया। जहां सैलानियों की चहल-पहल कम ही थी। दुकानदारों और विक्रेताओं का अंदेशा है कि अगले दो साल तक शायद ही स्थिति सुधरे।


ट्रेवल एजेंट अजहर ने पीएम मोदी और जिनपिंग के बाद मार्च २०२० तक पर्यटन परवान पर रहा लेकिन उसके बाद से हवाइयां उड़ रही हैं। वर्ना इस महीने में तो वाहन पार्क करने की जगह तक नहीं होती। उनके दौरे के बाद महाबलीपुरम साफ-सुथरा अवश्य हो गया है। लेकिन यह कब तक रहेगा इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मूर्तिकार व विक्रेता मदीयअझगन मानते हैं कि मोदी का करिश्मा बढ़ा है। उनके दौरे के बाद इस पर्यटन स्थल पर कारोबार बढ़ा था लेकिन कोरोना ने नुकसान पहुंचाया है।


सुविधाओं का अभाव
लोकल गाइड एस. कनीअप्पन और जयचंद्रन ने यात्रियों की कमी गिनाईं तो कहा कि महाबलीपुरम को टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने से पहले जनसुविधाओं मसलन, पार्किंग और शौचालयों की व्यवस्था करनी होगी। एएसआई की कुछ जगहों पर ज्यादतियां नागवार हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अगली बार चुनाव दौरे पर आते हैं तो महाबलीपुरम अवश्य आएंगे। प्रतिदिन हजारों पर्यटकों की मेजबानी करने वाले इस ऐतिहासिक क्षेत्र में माकूल बस स्टैंड भी नहीं है। महाबलीपुरम तिरुपोरूर विधानसभा क्षेत्र में आता है जिसकी आबादी करीब १८ हजार है। ऐसी उम्मीद है कि यह सीट एआईएडीएमके गठबंधन से पीएमके के खाते जाएगी।


महाबलीपुरम है खास
महाबलीपुरम भाजपा के एजेंडे में खास है। इसकी वजह केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी से इसकी निकटता भी है जहां राष्ट्रीय दल अपेक्षाकृत अधिक सशक्त है। उसके गठबंधन के प्रभुत्व वाले दलों एआईएडीएमके, पीएमके और डीएमडीके की भी यहां अच्छी पकड़ है। प्रधानमंत्री ने २०१९ में इस क्षेत्र को चुनते हुए तमिलों के साथ भाषा व संस्कृति के नए 'कनेक्टÓ की शुरुआत की थी। उसके बाद से मन की बात हो अथवा तमिलनाडु से जुड़ा कोई आयोजन वे तमिल में अवश्य बोलते हैं ताकि हिन्दी से जो उनका जादू चलता है वैसा ही कुछ करिश्मा वे तमिल में भी दिखा पाएं।

pm modi
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