राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने चिकित्सा क्षेत्रों में पेशेवरों की भारी कमी पर चिंता जाहिर करते हुए इस अंतर को शीघ्र भरने पर जोर दिया है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने चिकित्सा क्षेत्रों में पेशेवरों की भारी कमी पर चिंता जाहिर करते हुए इस अंतर को शीघ्र भरने पर जोर दिया है।

Ritesh Ranjan | Publish: May, 04 2018 07:32:36 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने चिकित्सा क्षेत्रों में पेशेवरों की भारी कमी पर चिंता जाहिर करते हुए इस अंतर को शीघ्र भरने पर जोर दिया है।

चिकित्सा क्षेत्रों में पेशेवरों की भारी कमी को भरना अत्यंत जरूरी : रामनाथ कोविन्द
-क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया
वेलूर. राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने चिकित्सा क्षेत्रों में पेशेवरों की भारी कमी पर चिंता जाहिर करते हुए इस अंतर को शीघ्र भरने पर जोर दिया है। राष्ट्रपति शुक्रवार को यहां क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) के शताब्दी समारोह का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा लोक स्वास्थ्य का आशय वैश्विक समुदाय की अच्छी सेहत से है और यह बुनियादी मानवीय अधिकार है। कई चुनौतियों मसलन, क्षेत्रीयता, ग्रामीण व शहरी, लैंगिक व सामुदायिक असंतुलन के बाद भी देश ने चिकित्सा के क्षेत्र में विकास किया है लेकिन इन समस्याओं के पर्याप्त निपटारे के बगैर हम आराम नहीं कर सकते।
कोविन्द ने कहा जब समाज का विकास होता है तब आर्थिक प्रगति होती है, जनसंख्या की प्रवृत्ति बदलती है और देश में महामारी से निपटने के प्रयास होते हैं। हमारे देश में भी यही परिवर्तन दृष्टिगत है। हमने रोग नियंत्रण में तीन चुनौतियों को चिन्हित किया है और हमें एक साथ इनसे निपटना है।
राष्ट्रपति ने कहा हमें पहले मातृ व शिशु मृत्युदर को कम करने के अलावा संक्रामक रोगों जैसे टीबी के अलावा जीवाणुजन्य रोग मलेरिया, जलजन्य रोग हैजा, डायरिया व अन्य से निपटना होगा। हमारे सामने दूसरी बड़ी चुनौती गैरसंक्रामक रोग अथवा जीवन शैली में बदलाव से पैदा रोगों को नियंत्रित करने की है। ये रोग मधुमेह, हृदय रोग और विविध तरह के कैंसर आदि हैं। तीसरी और अंतिम चुनौती नए विषाणुओं से होने वाले रोग मसलन एचआईवी, स्वाइन फ्लू आदि की पहचान करना और दवाओं की खोज करने के लिए नया तंत्र विकसित करने की है। वैश्वीकरण के इस दौर में जब बड़ी संख्या में एक देश से दूसरे देश लोगों का आना जाना होता है तब एक छोटा सा रोग कभी भी महामारी का रूप ले सकता है। इन तीनों चुनौतियों से जल्द से जल्द निपटना जरूरी है।
राष्ट्रपति ने चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधनों की कमी को रेखांकित करते हुए कहा कि देश में कुशल चिकित्सा पेशेवरों की कमी को तत्काल भरना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मेें बदलाव पर जोर दिया कि नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएं और अधिक संख्या में मेडिकल ग्रेजुएट निकलें। देश में १.४७ मिलियन अंडर ग्रेजुएट इंजीनियरिंग सीटें हैं जबकि मेडिकल सीटों की उपलब्धता ६७ हजार ३५२ ही है। पिछले चार सालों में मेडिकल सीटों में केवल २० प्रतिशत का ही इजाफा हुआ है। देश की विशालता और जरूरत को देखते हुए यह अंतराल कम करना होगा।
इस कार्यक्रम में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, राज्यसभा के उप सभापति डा. पी. जे. कुरियन व सीएमसी के पदाधिकारी व चिकित्सकगण उपस्थित थे।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned