लॉकडाउन में चौपट हो गया पुस्तक व्यवसाय

लॉकडाउन ने हर तरह के व्यापार पर असर डाला है। पुस्तक प्रकाशन एवं बिक्री के व्यापारी भी इससे अछूते नहीं रहे हैं।

By: Ashok Rajpurohit

Published: 30 Jun 2020, 11:44 PM IST

चेन्नई. लॉकडाउन ने हर तरह के व्यापार पर असर डाला है। पुस्तक प्रकाशन एवं बिक्री के व्यापारी भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान दुकानें खोलने पर पाबदी के चलते वे व्यापार नहीं कर सके। ऐसे में पुस्तकप्रेमियों के निराशा हाथ लगी। खासकर विद्यार्थी वर्ग को पुस्तकों के बिना दिन गुजारने पड़े। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले भी पुस्तके नहीं ले सके। एक प्रमुख पुस्तक प्रकाशक व विक्रेता का कहना था इन दिनों वैसे भी लोगों की रुचि किताबों के प्रति कम होती जा रही है। वे सोशल मीडिया पर घंटों चिपके रहते हैं। टेलीविजन देखते हैं तथा मोबाइल में ही मस्त रहने लगे हैं। ऐसे में उनको किताबें पढऩे की फुर्सत ही कहां है। उनका कहना था कि लॉकडाउन के कारण पुस्तक व्यवसाय पर गहरा असर पड़ा है। उनका धंधा लगभग चौपट हो गया है। ऑनलाइन बिक्री में भी कमी आई है। एक किताब लिखने एवं उसके बिकने में छह महीने लग जाते हैं। तब जाकर वह पुस्तक लोगों के बीच कुछ लोकप्रिय हो पाती है।
नई पुस्तकें बहुत कम लिखी गई
एक अन्य प्रकाशक का कहना था कि अमूमन की नए लेखक भी पुस्तक लिखते रहते हैं लेकिन इस बार लॉकडाउन की अवधि में नई पुस्तकें बहुत कम लिखी गई। पुराने लेखकों ने भी इतनी रुचि नहीं दिखाई। तमिलनाडु में करीब एक हजार पुस्तक प्रकाशक हंै इनमें से आधे तो चेन्नई में ही हैं। इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। इनमें डीटीपी आपरेटर, बाइंडर, प्रिन्टर, डिजाइनर समेत अन्य शामिल हैं। लॉकडाइन के दौरान बिजनेस बिल्कुल न के बराबर हुआ। इसका सीधा असर हजारों लोगों पर पड़ा। लॉकडाउन के दौरान उनके पास कोई काम न होने से उनकी आजीविका चलाना मुश्किल हो गया।
सरकार प्रकाशकों की मदद करे
एक प्रकाशक का कहना था कि सरकार की ओर से प्रकाशकों को मदद दी जानी चाहिए ताकि वे अपना काम फिर से पटरी पर ला सकें। इसके साथ ही प्रकाशकों के पास पहले से छपकर तैयार पुस्तकें विभिन्न सरकारी पुस्तकालयों के लिए खरीद की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो कई लोगों को अपना व्यवसाय संभालने का मौका मिल सकता है।
एक पुस्तक प्रेमी का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान दुकानें खुली नहीं होने के कारण वह कोई नई पुस्तक नहीं खरीद सका। साथ ही उसने ऑनलाइन कई पुस्तकों को डाउनलोड कर पढऩे का शौक पूरा किया। लॉकडाउन के दौरान वे दुकानें भी बन्द थी जो सड़क के किनारे लगती है। यहां पुरानी पुस्तकों का बाजार लगता है। जहां खासकर इंजीनियरिंग व मेडिकल के छात्रों को सस्ते दामों में किताबें पढऩे को मिल जाती हैं।

Ashok Rajpurohit
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