अहंकार छोड़ें, जिनशासन की आज्ञा पालन करें

अहंकार छोड़ें, जिनशासन की आज्ञा पालन करें

Ashok Singh Rajpurohit | Publish: Sep, 05 2018 12:01:15 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

आज्ञा देने वाला आज्ञा देने के बाद विश्राम नहीं करते वे स्वयं उसकी परख करते हैं। आज्ञा से बाहर रहने वाला ही असुरक्षित है। उन्हें देव, गुरु, धर्म और जिनशासन की आज्ञा मिलती है। जो तीर्थंकर की सुरक्षा से बाहर चले जाते हैं वे स्वयं का विनाश करते हैं।

 

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा सुरक्षा हर व्यक्ति चाहता है। परमात्मा कहते हैं जो स्वयं का जीवन सुरक्षित करता है वही सुरक्षित है। परमात्मा की आज्ञा है- हृदय विचारों में खुला होना चाहिए, आचरण और चरित्र में नहीं। जिसका मन और काया, सुरक्षित है वही सुरक्षित है। आज्ञा के बाहर जाने वाले असुरक्षित हो जाते हैं और जो असुरक्षित है वही आज्ञा से बाहर है।
आज्ञा देने वाला आज्ञा देने के बाद विश्राम नहीं करते वे स्वयं उसकी परख करते हैं। आज्ञा से बाहर रहने वाला ही असुरक्षित है। उन्हें देव, गुरु, धर्म और जिनशासन की आज्ञा मिलती है। जो तीर्थंकर की सुरक्षा से बाहर चले जाते हैं वे स्वयं का विनाश करते हैं। यदि कर्मचारी आज्ञा का पालन नहीं करे तो उसे वेतन या पारिश्रमिक कैसे मिलेगा। आज के समय में संसार में पग-पग पर रावण तैयार खड़े हैं। हमें आज्ञा बंधन और गुलामी लगती है, परतंत्रता लगती है लेकिन शिकारियों से बचना हो तो पिंजरे में रहना बेहतर है। कर्म, वासना के सारे शिकारियों से बचना हो तो परमात्मा की आज्ञा में रहना होगा।
अहंकार रहते आज्ञा पालन नहीं कर पाते, सबसे पहले अपने अहंकार को छोड़ें।
अपने बेटे को सुखी नहीं समर्थ बनाओ, बेटी को मनमर्जी का सुख मत दो, उसे समझदार बनाओ। जैसा घर मिले उसे अच्छा बनाना आना चाहिए। कहां तक माता-पिता, और घर वालों की सुरक्षा काम आएगी। अंत में आज्ञा की सुरक्षा ही काम आती है।
आज्ञा जिनको बंधन लगती है वह पाप दृष्टि है। जिन्हें सुरक्षा और कृपा दिखती है वह सम्यक दृष्टि है। यदि धर्म को मानने वाले का साथ मिले तो गरीब घर भी अच्छा है लेकिन मिथ्यात्वी का साथ पाकर उसका सारा जीवन नष्ट हो जाता है। धर्म का संग पाने की सोच जिनके मन में सदैव रहती है, यह उनकी पीढ़ी-दर-पीढ़ी का सौभाग्य बन जाता है।
उन्होंने बताया ६ सितम्बर से पर्यूषण पर्व पर विशेष कार्यक्रम श्रृंखला शुरू होगी। इस अवसर पर अधिकाधिक तप और धर्माराधना से अपने कर्म बंधनों का क्षय कर मानव जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया।

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