मौजूदा दौर की महिला अधिक सफल, सशक्त व आत्मनिर्भर

राजस्थान पत्रिका की मेजबानी में 'पत्रिका टॉक शो' में महिलाओं ने खुलकर रखे अपने विचार
- आज की महिला किसी से कम नहीं, हर क्षेत्र में दिखाई अपनी काबिलियत
- मौजूदा दौर की महिला अधिक सफल, सशक्त व आत्मनिर्भर

By: Ashok Rajpurohit

Published: 12 Mar 2021, 02:19 PM IST

चेन्नई. मौजूदा दौर में महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता का लोहा मनवाया है। वे आत्मविश्वास से भरपूर है। संयम व धैर्य की प्रतिमूर्ति है तो इरादे भी मजबूत व बुलंद है। स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ रही आज की नारी ने अपनी काबिलियत के दम पर हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने में कामयाबी पाई है। सामाजिक कुरीतियों के दायरे से आगे आज की नारी सफलता के कीर्तिमान गढ़ रही है।
राजस्थान पत्रिका चेन्नई की मेजबानी में 'पत्रिका टॉक शो' में महानगर की महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। महिलाओं ने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं ने अपने दम पर अपनी श्रेष्ठता को हर जगह साबित करके दिखाया है। हालांकि उनका मानना है कि यदि परिवार व समाज का साथ मिले तो महिलाएं और अधिक उंचाइयां छू सकती है। आज की महिला चूल्हे-चौक की मानसिकता के दायरे से बाहर आ रही है। प्रशासनिक क्षेत्र में महिलाएं आगे आई हैं तो खेल के क्षेत्र में महिलाओं ने समूचे विश्व में अपना नाम कमाया है। डिफेंस में आज महिलाएं अग्रिम पंक्ति में नजर आ रही है तो बिजनेस को भी सफलतापूर्वक संचालित करने ने अपनी प्रतिभा दिखाई है। राजस्थान पत्रिका चेन्नई के मुख्य उप संपादक अशोकसिंह राजपुरोहित ने 'पत्रिका टॉक शो' का संचालन एवं संयोजन किया।
....................................

खुद के बूते आगे बढ़ रही महिलाएं
हर सफल पुरूष की सफलता के पीछे नारी का हाथ होता हैं। यह वाक्य कहने में जितना अच्छा लगता हैं, उतना ही मार्मिक भी है और सत्य भी। और अब तो महिला ने और भी अपने कदम आगे बढ़ाए हैं। आज वह हर क्षेत्र में स्वयं के बलबूते पर आगे बढने का माद्दा रखती है। वह निश्चित रूप से विकासोन्मुख है। अब समय ने करवट ले ली है। आज नारी पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर आगे बढ़ रही है। साक्षरता दर पुरुषों के बराबर पहुंच गई है। नारी की स्वच्छन्दता के चलते तलाक़ के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विज्ञापन और सिनेमा ने नारी की अस्मिता पर कुठाराघात किया है। कुल मिलाकर नारी को सम्मान और समानता दोनों में अभिवृद्धि हुई है। और महिला को मुगलकाल से पहले वाला महत्व वापस मिलने लग गया है। बस आवश्यकता है तो कुछ विषमताओं का निवारण करने की।
- मंगला बोहरा, पूर्व चेयरपर्सन, गणगौर, राजस्थानी एसोसिएशन की महिला इकाई।
....................

चूल्हा-चौक का जमाना अब लद गया
अक्सर कहा जाता है कि महिला तो घर में ही चौखी लागै। वह तो घर के लिए ही बनी है। चूल्हा-चौक ही संभाले। जरूरत केवल इस सोच को बदलने की है। परिवार को विश्वास में लेकर आगे बढ़ें। आज उस क्षेत्र में भी महिलाएं आगे बढ़ी है जो केवल पुरुषों का ही क्षेत्र माना जाता था। बिना संघर्ष के महिलाएं आगे नहीं बढ़ी। आज छोटे गांव की महिला आगे आने लगी है। विकास के लिए आगे बढ़ना है तो महिला को सशक्त होना जरूरी है। पहले खुद को बदलें। एक स्त्री के विकास में समूचे समाज का विकास निहित है। क्योंकि संस्कारित शिक्षित स्त्री से न सिर्फ घर संवरता है बल्कि समाज सुधरता है। अच्छे संस्कारों से उत्तम आचरण से नैतिकता में निखार आता है। कई जगह महिला अब भी पीछे हैं। उन क्षेत्रों में हमें विशेष प्रयास करने की जरूरत है।
-कुसुम जैन ओस्तवाल, अध्यक्ष, जय जैनम एकेडमी।
.......................................


रोबोटिक जैसे क्षेत्र में महिलाएं आ रही आगे
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आकाश से धरती तक हर फिल्ड में महिलाएं अपनी प्रतिभा सिद्ध कर चुकी है। मंगलयान की सफलता के पीछे महिलाओं की सोच एवं कार्यप्रणाली सराहनीय है। हम तकनीकी के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा दे सकते हैं। रोबोटिक जैसे क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही है। आज पुरुष प्रधान समाज में महिलाएं अपने निर्णय खुद लेने लगी है। हमें संस्कारित व सुसभ्य समाज के निर्माण के लिए आगे आना होगा। किन्ही कारणों से जो महिलाएं पीछे रह गई उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास करने होंगे। इसकी शुरुआत हमें शिक्षा से करनी होगी। आज की महिलाओं में खूब प्रतिभा है, हूनर है। जरूरत केवल उन्हें अवसर देने का है।
- मंजरी नेवर, इंटीरियर डिजाइनर व प्रबंध निदेशक, श्रीटेक एकेडमी।
.............................

आज की महिला अधिक आत्मविश्वासी
महिला अगर ठान ले तो बहुत कुछ कर सकती है। इसके लिए परिवार भी सपोर्ट करे। महिलाएं अब निर्णय खुद लेने में समर्थ हुई है। मन में संकल्प लें कि मुझे आगे बढ़ना है। कुछ करना है। जब सफलता मिलती है तो हर कोई साथ देता है। प्रोत्साहन भी देता है। ब्यूटी इंडस्ट्री बहुत बड़ी है। मेकअप आर्टिस्ट बनने के लिए बहुत बड़ा संबल होना चाहिए। इस इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए अब कई नवाचार भी होने लगे हैं। मैंने विदेश में जाकर ट्रेनिंग की और अब कई महिलाओं को सिखा रही हूं। मेकअप व ब्यूटी इण्डस्ट्री के साथ ही कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां महिलाएं आसानी से अपनी जगह स्थापित करने में सफल हो सकती है। आज की महिला अधिक आत्मविश्वासी है।
- हर्षा परमार, सामाजिक कार्यकर्ता, मेकअप व ब्यूटी इण्डस्ट्री।
...................................

महिलाओं को शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बनाएं
ग्रामीण परिवेश की यदि बात की जाएं तो पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं की स्थिति में सुधार आया है। गांवों में अब बालिका शिक्षा पर जोर दिया जाने लगा है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। वे कामयाबी की नई इमारत गढ़ने लगी है। आत्मनिर्भरता के बिना महिला सशक्तिकरण की कल्पना नहीं की जा सकती है। सरकारी योजनाओं, महिला संगठनों की मदद से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास निरन्तर किया जाना चाहिए। आर्थिक शक्ति के साथ महिला को मानसिक व शारीरिक रूप से भी सशक्त बनाने की जरूरत है। रानी लक्ष्मीबाई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी सरीखे कई नाम हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा के बाल पर ही समाज एवं देश को नई दिशा दी।
- सुनीता सारण चौधरी, गृहिणी एवं सामाजिक कार्यकर्ता।
..................................................

महिलाओं को मिल रहे अवसर
नारी यदि सशक्त होगी तो समाज भी सशक्त होगा। हमें समाज में महिलाओं की भूमिका को सीमित नहीं बल्कि प्रोत्साहित करना चाहिए। देश की उन्नति में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है। आज की महिलाएं खुद तो सफल बनी हैं ही, वे समाज, देश एवं दुनिया को आगे ले जाने का हूनर रखती है। निर्मला सीतारमण, मिताली राज, सानिया नेहवाल, गुंजन सक्सेना सरीखे कई नाम हैं जिन्होंने इस बात को सिद्ध किया है कि महिलाएं किसी से कम नहीं है। पहले की तुलना में महिला को अधिक अवसर मिल रहे हैं। हालांकि इस बात का दूसरा पहलू यह भी है कि शिक्षा एवं साधन के अभाव में कई महिलाएं अपना कौशल एवं प्रतिभा दिखा नहीं पाती है। जरूरत इस बात की है कि ऐसी महिलाओं को आगे लाया जाएं।
- रिचा चौधरी, पूर्व अध्यक्ष, फ्रेन्ड्स व सामाजिक कार्यकर्ता।
.............................


महिलाओं के प्रति सोच को बदलना होगा
आज की महिला में जोश है। हर क्षेत्र में आर्थिक व मानसिक रूप से अधिक मजबूत हुई है। परिवार करियर दोनों को बखूबी संभाल रही है। महिला अपने आप में यकीन रखें। हर नारी में वो काबिलियत है कि वह अपने आप को आगे ला सकती है। जरूरत केवल अवसर मिलने का है। राजस्थान में बाड़मेर जिले की उमादेवी छोटे गांव से आती है लेकिन अपनी प्रतिभा एवं लगन के बल पर समूचे विश्व में नाम कमाया है। हमें महिलाओं के प्रति सोच को बदलना होगा। वे आज हर काम करने में सक्षम है। जरूरत केवल उन्हें प्रोत्साहन देने की है। एक स्त्री के विकास में समूचे समाज का विकास होता है। इसे आज हम हर जगह देख भी रहे हैं। जिस तरह से महिलाओं ने अपनी श्रेष्ठता को सिद्ध करके दिखाया है उससे लगता है कि वह आने वाले समय में और तेजी से आगे बढ़ेगी।
-पूर्वी ओस्तवाल, एक निजी बैंक में प्रबंधक।
.......................

Ashok Rajpurohit
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned